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EXCLUSIVE: अब आसाराम की नाइट लाइफ का एक और रंगीन खुलासा

अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में वर्ष 1993 से 2003 तक आसाराम के साधक रहे राहुल शर्मा का विशेष इंटरव्यू।

Danik Bhaskar | Oct 03, 2013, 12:04 AM IST
अहमदाबाद। जोधपुर में एक नाबालिग भक्त के साथ दुष्कर्म के आरोप में आसाराम जोधपुर की जेल में हैं। अब उनके बारे में खुद उनके ही शिष्य-शिष्याएं जिस तरह के खुलासे कर रहे हैं, उससे लगता है कि आसाराम और सेक्स दोनों एक सिक्के के दो पहलू बन गए हैं।
हाल ही में आसाराम के एक साधक अजय ने खुलासा किया था कि उसने खुद आसाराम को आश्रम के स्वीमिंग पूल में एक निर्वस्त्र महिला के साथ नहाते देखा था। अब इसके बाद मोटेरा आश्रम (अहमदाबाद) के ही एक एक और साधक ने आसाराम की नाइट लाइफ का खुलासा किया है।
वर्ष 1993 से 2003 तक अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में आसाराम के साधक रहे राहुल शर्मा ने दिव्यभास्करडॉटकॉम को दिए विशेष इंटरव्यू में आसाराम के कई राज खोले हैं। राहुल ने बताया कि वे पूरे चाल तक आसाराम के करीबी रहे थे।
अगली स्लाइडों में पढ़ें राहुल शर्मा का पूरा इंटरव्यू...

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राहुल के शब्दों में..‘मुझे आसाराम की शांतिकुटिया में प्रवेश की अनुमति थी। मैं अक्सर रात को आसाराम के लिए अफीम और अन्य सेक्स वर्धक दवाईयां देने जाया करता था। इतना ही नहीं, रात के समय आसाराम कोकशास्त्र और वात्सायन सूत्र (कामसूत्र) की किताबें पढ़ा करते थे। इस दौरान आश्रम के किसी भी व्यक्ति को शांतिकुटिया में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। साधकों से यही कहा जाता था कि आसाराम साधना में बैठे हैं।’

 

 

 

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राहुल बताते हैं कि आसाराम उनसे भी अक्सर यही कहा करते थे कि आयुर्वेद को जानने के लिए ऐसी पुस्तकें व शास्त्र पढ़ना बहुत जरूरी है। मैं उनकी यह बात सुनकर अचरज में पड़ जाता था, लेकिन उनके प्रति मेरी अपार श्रद्धा के कारण मुझे उनकी मानसिकता पर उस समय शक नहीं हुआ था। 

 

 

 

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‘एक दिन मैंने शांतिकुटिया का दरवाजा खोला और ऐसा दृश्य देखा कि मेरे पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई। इस समय आसाराम की बाहों में एक 17 वर्षीय लड़की थी और आसाराम उसके गले पर चुंबन कर रहे थे। मैं तुरंत ही दबे पांव वहां से निकल आया कि कहीं आसाराम मुझे ये सब देखते हुए न देख लें। मैं इस दिन पूरी रात सो नहीं पाया। मेरी बापू के प्रति अपार श्रद्धा थी और मैं आश्रम में यही सोचकर रह रहा था कि यहां धर्मशास्त्र का ज्ञान और भगवान की प्राप्ति हो सकती है। जबकि यहां तो धर्माधिकारी ही घिनौने कृत्य में लगा हुआ था।’ 
 
राहुल ने आगे कहा, ‘इसी घटना के बाद मैंने आश्रम छोड़ने का निर्णय कर लिया और कुछ समय बाद पारिवारिक कारण बताकर आश्रम छोड़ दिया।’
 
 

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आसाराम को है बच्चों का यौन शोषण करने की बीमारी!
 
जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद आसाराम की ओर से पेश जमानत आवेदन हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मंगलवार को न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आसाराम बच्चों का यौन शोषण करने की बीमारी ‘पीडोफाइल’ से ग्रसित है।
 
इस संबंध में एक चिकित्सक का प्रमाण पत्र भी पेश किया गया। दूसरी ओर आसाराम के वकील राम जेठमलानी ने पीड़िता के चरित्र और आचरण के खिलाफ चार शपथ पत्र पेश किए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश पुलिस की केस डायरी के आधार पर आसाराम को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया।
 
अगली स्लाइडों में पढ़ें, एक अन्य साधक की जुबानी..
 
 

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अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में रहने वाले अजय कुमार ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। दिव्यभास्करडॉटकॉम को दिए एक इंटरव्यू में अजय ने बताया कि उन्होंने खुद आसाराम को आश्रम में बने स्वीमिंग पुल में एक महिला के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा था।
 
अजय ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मोटेरा आश्रम में एक आलीशान स्वीमिंग पुल भी है। यह स्वीमिंग पुल आसाराम की शांति कुटिया में स्थित है, जहां किसी भी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। जब भी आसाराम शांति कुटिया में होते हैं तो पहले ही आश्रम के सारे व्यक्तियों को इसकी सूचना दे दी जाती है, ताकि कोई गल्ती से भी शांति कुटिया में प्रवेश न करे।
 
 

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अजय बताते हैं कि यह स्वीमिंग पुल लग्जूरियस है और इसमें ब्लू कलर के महंगे टाइल्स लगे हुए हैं। जब भी आसाराम आश्रम में होते हैं तो उस दिन स्वीमिंग पुल को साफ पानी से भरा जाता है। अजय के अनुसार स्वीमिंग पुल भरने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी। इतना ही नहीं, आसाराम अगर सत्संग के लिए भी आश्रम आते, तब भी वे इसी स्वीमिंग पुल में नहाया करते थे।

 

 

 

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अजय बताते हैं कि शांतिकुटिया के चार प्रवेशद्वार हैं। एक बार मैंने शांतिकुटिया का मुख्य दरवाजा खोला तो मेरी सीधी नजर स्वीमिंग पुल पर पड़ी। यह दोपहर का समय था और आसाराम अपनी धोती में स्वीमिंग पुल में नहा रहे थे, जबकि इसी समय एक महिला स्वीमिंग पुल से बाहर निकल रही थी। 
 
अजय कहते हैं कि इस महिला को मैं अच्छी तरह पहचानता हूं। यह दृश्य देखकर मैं एक पल के लिए चौंक उठा, क्योंकि युवती किसी बिकिनी में नहीं, बल्कि सिर्फ एक कपड़ा अपने बदन पर लपेटे हुए थी। 
 
 

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अजय बताते हैं कि बीते दिन जब मैंने एक न्यूज चैनल पर यह खबर देखी कि मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित आश्रम में भी आसाराम के लिए एक स्वीमिंग पुल बनवाया गया था। तभी मुझे अहमदाबाद आश्रम की लगभग 10-15 साल पहले की यह घटना याद आई। इस समय स्वीमिंग पुल के चारों तरफ लगभग 19 फीट की दीवाल थी। इसके अलावा स्वीमिंग पुल के चारों तरफ वृक्ष थे।

 

 

 

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अजय कुमार के शब्दों में.. मोटेरा आश्रम की शांतिकुटिया में सिर्फ आसाराम की युवतियों को नहीं बुलाया करते थे, बल्कि उनके बेटे नारायण साईं भी आश्रम में रंगरेलियां मनाया करते थे। 
 
अजय कहते हैं. ‘मैंने खुद एक बार अपनी आंखों से देखा था कि नारायण साईं आश्रम में रहने वाले एक विद्यार्थी के गालों पर हाथ फेर रहे थे। इसके बाद उन्होंने उसके गाल पर किस किया। नारायण साईं का व्यवहार बिल्कुल होमोसेक्सुअल जैसा था। मैं यह सब देखकर उस रात सो नहीं पाया था। मेरी आंखों के सामने बार-बार वही दृश्य घूम रहा था और मैं सोच रहा था कि एक संत के रूप में पहचाना जाने वाला व्यक्ति ऐसा भी हो सकता है।’
 
 

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अजय ने बताया..‘वह विद्यार्थी गुजरात के सूरत शहर से था। मैं दूसरे दिन सुबह उससे मिलने गया। मैंने उससे पूछताछ की कि नारायण साईं रात में उसके साथ क्या कर रहे थे? मुझे ऐसा लगा कि वह विद्यार्थी मुझे कुछ जानकारी देगा, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। उस विद्यार्थी ने सीधे नारायण साईं से ही मेरी शिकायत कर दी।’

 

 

 

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अजय ने आगे बताया, ‘जैसे ही नारायण साईं को यह बात पता चली कि उनका गुस्सा मुझे पर टूट पड़ा। मुझे एक कमरे में बंद करके अन्य साधकों ने बहुत पीटा। मैं समझ गया था कि अब मेरी जान को खतरा है। इसलिए मैंने रात में ही आश्रम से भागने का प्लान बना लिया। मध्य रात्रि में जब सभी लोग आश्रम में गहरी नींद में थे, तभी मैं दबे पांव आश्रम से बाहर निकला और आश्रम की दीवार फांदकर साबरमती नदी के तट पर आ गया।’

 

 

 

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‘नदी किनारे घनघोर अंधेरा था और मैं ठीक से चल भी नहीं पा रहा था, क्योंकि साधकों ने मुझे बहुत पीटा था और मेरे पैरों में भी चोट लगी थी। लेकिन फिर भी मैं यह सोचकर अंधेरे में भी भागता रहा कि कहीं आश्रम के साधक मेरा पीछा करते हुए मुझ तक पहुंच गए तो मुझे जान से ही मार डालेंगे। मैं लगातार तीन घंटे तक भागता रहा और आखिरकार हाईवे तक पहुंच गया। यहां मैंने एक ट्रक चालक से कहा कि मेरी जान को खतरा है और कुछ लोग मेरे पीछे लगे हुए हैं। मेरी बात सुनकर ट्रक चालक ने मुझे ट्रक में बिठा लिया और इस तरह मैं जयपुर पहुंच गया।’

 

 

 

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अजय ने आगे बताया, ‘जयपुर से मैं ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुंचा। दरअसल मैं अपने वतन हरियाणा न जाकर दिल्ली यह सोचकर पहुंचा कि कहीं मेरी चोटों के बारे में घरवाले न पूछ लें। मैंने कुछ दिन दिल्ली में गुजारे और जब मैं कुछ ठीक हुआ तो अपने घर हिसार (हरियाणा) पहुंचा। इस मामले में मेरी बदकिस्मती यह थी कि मेरे पिताजी आसाराम के अंध भक्त थे। इसलिए वे मेरी बात का यकीन नहीं करते।’ 
 
अजय बताते हैं कि अब तक मुझ पर चार बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। 
 
इसके साथ ही अजय ने एक और चौंकाने वाली बात यह बताई कि आसाराम के लिए लड़कियां खुद उनके बेटे नारायण साईं ही लाया करते थे। अगली स्लाइड में पढ़े, अजय के शब्दों में..
 
 

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‘ये गर्मी के दिन थे और मध्यरात्रि का समय था। मैं मोटेरा आश्रम में बाहर बगीचे में लेटा हुआ था। रात के लगभग दो बजे थे। मेरी नींद एक कार की आवाज से खुल गई थी। यह कार आसाराम की ध्यानकुटिया के बाहर आकर रुकी थी। इसी बीच कुटिया से तीन मॉर्डन लड़कियां बाहर निकलीं और कार मैं बैठकर रवाना हो गईं। यहां आश्चर्य की बात यह थी कि कार इस समय खुद नारायण साईं चला रहे थे।’
 
यह दृश्य देखकर मैं हैरत में पड़ गया कि आसाराम के लिए खुद उनका बेटा ही लड़कियां लेकर आता है। इसी घटना के बाद से मेरे दिल में आसाराम और नारायण साईं के लिए कोई जगह नहीं बची थी। अजय बताते हैं कि आश्रम में बाप-बेटे की रासलीला वर्षो से नित्यक्रम चल रही थी।
 
 

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हिसार में रहने वाले अजय बताते हैं ‘एक बार हिसार में आसाराम के सत्संग हुआ और इसी के बाद से मैं उनका साधक बन गया। हालांकि मेरे पिता पहले से ही आसाराम के भक्त थे। इतना ही नहीं, मैंने 1992 में दीक्षा भी ली और इसके बाद मैं अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम आ गया। इस समय मेरी उम्र 16 साल थी। इस दौरान आसाराम ने मुझे और अन्य बालकों को चांदखेड़ा के ज्ञानदीप गुरुकुल में पढ़ने के लिए भेजा था।’ 

 

 

 

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