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गुजरात दंगे : कोडनानी-बजरंगी को फांसी की अपील पर लगाई रोक

8 वर्ष पहले
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अहमदाबाद। गुजरात सरकार ने पूर्व मंत्री डॉ.मायाबहन कोडनानी एवं बाबू बजरंगी सहित दस सजायाफ्ताओं के लिए फांसी की अपील हेतु दी इजाजत रद्द कर दी है। राज्य के विधि विभाग ने मुख्य सरकारी वकील को पत्र लिख कर इस फैसले से अवगत कराया है। कोडनानी सहित सभी साल 2002 के नरोडा पाटिया कांड में सजायाफ्ता हैं। निचली अदालत से इन्हें उम्रकैद की सजा हुई है।

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इन सभी को फांसी की सजा के लिए अपील करने की इजाजत मांगी थी। 16 अप्रैल को सरकार ने एसआईटी को इजाजत दे दी थी। हालांकि अब इसे वापस ले लिया गया है। 10 मई 2013 को हाईकोर्ट में मुख्य सरकारी अधिक्ता प्रकाश जानी को लिखे पत्र में सूचित किया गया कि अपील के लए दी गई अनुमति वापस ली जाती है। इस पत्र की छायाप्रति अपील पैनल के प्रशांत देसाई को भी भेजी गई है।


यूं चला घटनाक्रम:

कोडनानी सहित 10 आरोपियों के लिए फांसी की मांग करती सिफारिश एसआईटी ने गुजरात सरकार के विधि विभाग को भेजी थी। विधि विभाग ने 16 अप्रैल को इस पर मुहर लगा दी। इसी के साथ अपील के लिए प्रशांत देसाई, गौरांग व्यास एवं अल्पेश कॉग्जे की सदस्यता के तीन अधिवक्ताओं के पैनल का गठन किया गया। प्रशांत देसाई, जो कि नरोडा पाटिया केस में अपील पैनल के सदस्य हैं, ने अपील की अनुमति रद्द होने की बात की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार के विधि विभाग के सेक्शन अधिकारी ने हाईकोर्ट के मुख्य सरकारी अधिवक्ता प्रकाश जानी को एक पत्र लिखा है। इसमें सूचित किया गया है कि नरोडा पाटिया केस में पहले राज्य सरकार द्वारा दी गई अपील की इजाजत वापस ली जाती है। इसलिए अब अगली सूचना तक इंतजार करें। बकौल, देसाई पत्र में यह भी लिखा है कि नरोडा पाटिया कांड के सभी
कागजात एडवोकेट जनरल को सौंप दिए जाए। इसलिए मैंने मुख्य सरकारी अधिवक्ता के कार्यालय में अपील के लिए जमा करवाए केस के कागजात वापस मांगने की प्रक्रिया शुरू की है। गोधरा कांड के बाद आहूत गुजरात बंद के दौरान नरोडा पाटिया कांड हुआ था। पूर्वी अहमदाबाद में हुई इस घटना में 97 लोग मारे गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी ने जांच की थी।


सर्वोच्च न्यायालय जा सकती है एसआईटी:

अचानक हुए इस घटनाक्रम से एसआईटी अधिकारी असमंजस में हैं। जांच दल सूत्रों इस गुजरात सरकार के इस कदम को कानूनी दायरे से बाहर का कदम बता रहे हैं। साथ ही इन सूत्रों ने राज्य के इस कदम को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी दर्शाई है।