अहमदाबाद। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गुजरात सरकार को एनकाउंटर में मारे गए लोगों के आश्रितों को मुआवजा देने का हुक्म दिया है। पूर्व न्यायाधीश एसएच बेदी की अगुवाई वाली एसटीएफ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2003 से 2006 की अवधि में गुजरात में हुए एनकाउंटर में से 17 मामलों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल तीन मामलों में आश्रित राहत घोषित की गई है। सरकार को पहली फरवरी तक भुगतान के आदेश के क्रियान्वयन की ताकीद की गई है।
आईजीपी एके शर्मा ने एसटीएफ से मुआवजे के भुगतान का आदेश होने की पुष्टि की। साथ ही कहा कि जिन्हें मुआवजा दिया जा रहा है उनके बैंक एकाउंट एसटीएफ की ओर से खुलवाए जाएंगे। 2012 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आदेश के तहत सरकार बोरसद के राजेश्वर पांडे के मामले में पांच लाख का भुगतान कर चुकी है। दूसरी ओर, गृह विभाग ने संबंधित जिलों की तिजोरी को निर्धारित पैसा एसटीएफ को देने की सूचना दे दी है।
मुआवजे का मतलब माफी नहीं:
एसटीएफ ने आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह अंतरिम राहत है। जरूरत पडऩे पर एसटीएफ इसमें वृद्धि कर सकती है। मुआवजे के भुगतान यह अर्थ कदापि नहीं है कि आरोपों को रद्द समझा जा रहा है। केस की जांच यथावत जारी रहेगी।
क्यों लिया मुआवजे का फैसला:
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि एनकाउंटर में मारे गए लोगों के परिवार में आर्थिक उपार्जन करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में आश्रितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। मुआवजे की राशि का निर्धारित करने के लिए आश्रितों की संख्या को आधार बनाया गया है।
किसे कितना लाभ :
1- हिमवा मछार डुंगरी (वापी)। पीडि़त की सात वर्ष की बेटी है। चार लाख रुपए मुआवजा देने का हुक्म। 2- रफीक बापुडी (राजकोट)। दो संतानें है। कुल छह लाख। 3- कासम जाफर ईरानी (अहमदाबाद)। पांच संतानों के लिए कुल 14 लाख।