सिद्दपुर(गुजरात). उत्तर गुजरात का वायड गांव अब पूरी तरह मेडिक्लेम सुरक्षा कवच के तहत आ गया है। ये कवच ग्राम पंचायत ने नहीं अपितु एक ही व्यक्ति ने लिया है। नाम है डॉ. तुषार लाखिया, उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा ग्रामीणों को बीमा पॉलिसी और मेडिक्लेम कार्ड उपलब्ध करवा दिए हैं ताकि वे कैशलैस सुविधा का लाभ उठा सकें। इसका लाभ गांव 846 परिवार और 4200 लोगों को मिलेगा। गांव के हर परिवार के पांच सदस्य 30 हजार तक की मेडिकल सेवा पा सकेंगे।
उद्देश्य था ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना
अपने गांव से सभी को लगाव होता है। आज मैं इस स्थिति में हूं कि अपने ग्रामीणों के लिए कुछ कर सकूं। इसी विचार ने प्रेरणा दी। खुशी है कि मेरे परिचित-दोस्त जो इस बारे में जान रहे हैं वह भी इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उच्च-शिक्षा और प्रोफेशन की जरूरतों के चलते गांव से बाहर निकलना हुआ लेकिन गांव से संपर्क बरकरार। लोग बीमार होते तो संपर्क करते। अहमदाबाद भी आते।
तब जो हो सकता करता था क्योंकि हर समय कुछ न कुछ सीमाएं आपकी रहती हैं। तभी विचार आया क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे ग्रामीणों स्वास्थ्य सेवा के मामले में आत्मनिर्भर हो सकें। जवाब मिला -बीमा कवच। परिचितों की मदद से संभावनाएं तलाशी। बात बन गई। अभी ये कवच एक साल के लिए है। उम्मीद है इस दौरान लोग बीमा कवच के लाभ को लेकर जागरूक होंगे।
सलाह देने से कुछ ज्यादा करने की इच्छा मन में थी
अहमदाबाद के वीएस अस्पताल से जुड़े रहे डॉ. लाखिया कहते हैं कि डॉक्टर होने के नाते ग्रामीणों को स्वास्थ्य के बारे में सलाह देता ही रहता हूं। गांव के लिए इससे कुछ अधिक करने चाहता था। इसी उधेड़बुन में ये विचार आया, बस लागू कर दिया। जिला पंचायत पदाधिकारियों ने भी इस कार्य में हमारी मदद की। लोग अपने परिवार और कंपनियां मुलाजिम के लिए मेडिक्लेम लेते हैं ताकि लाभार्थियों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। बस यही सोचकर मैंने ग्रामीणों की सहायतार्थ ये प्रयास किया है।