अहमदाबाद। पूर्व जस्टिस जीटी नानावटी एवं अक्षय शाह आयोग सितंबर के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोग फरवरी 2002 में हुए गोधरा कांड पर अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप चुका है। गोधरा कांड के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों पर रिपोर्ट देना बाकी है। आयोग का 23वां सेवाकाल विस्तार 30 सितंबर को पूरा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक अब वह कार्यकाल बढ़ाने की मांग नहीं करेगा।
12 वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है:
जांच आयोग का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा था। इस तरह आयोग की अवधि 23वीं बार बढ़ाई गई थी। आयोग ने राज्य सरकार से अवधि बढ़ाने को लेकर गुहार लगाई थी। राज्य सरकार ने गत वर्ष दिसम्बर में आयोग का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ाया था। आयोग के गठन को 12 वर्ष से ज्यादा समय बीत चुका है। राज्य सरकार ने जांच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत मार्च 2002 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस जी.टी. नानावटी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय आयोग का गठन किया था। जून 2004 में राज्य सरकार ने आयोग के जांच के दायरे को बढ़ाते हुए दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्यों व पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच को भी कहा था।