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डाउनलोड करेंअहमदाबाद। फरवरी-2012 के साबरमती जेल सुरंगकांड में पुलिस ने जेल अधीक्षक आर.जे. पारघी एवं तीन जेलर सहित नौ लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। जेल अधिकारियों पर मुख्यत: कारागार में सुरंग का पता चलने पर इसे बंद करने सहित आरोप हैं। मामले में जेल प्रशासन पहले से ही शंका के दायरे में था। मामले में आरोपी बनाए गए इन नौ में जुलाई 2008 के अहमदाबाद श्रंखलाबद्घ बमकांड के तीन आरोपी भी शामिल हैं। अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है।
जांच एजेसी सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को हरी झंडी मिलने के बाद प्रकरण दर्ज किया गया है। जेल अधिकारियों पर सबूत नष्ट करने, षडयंत्र, आरोपियों की मदद करने, जांच एजेंसी को गलत जानकारी देने सहित धाराओं के तहत आरोप हैं। प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। ये आरोप साबित हुए तो आरोपियों को दो से तीन साल की सजा हो सकती है।
क्या है मामला :
11 फरवरी को राज्य की हाईटेक सुरक्षा वाली साबरमती जेल में बमकांड के कैदियों द्वारा सुरंग खोदे जाने का खुलासा हुआ था। यह सुरंग कारागार के छोटा चक्कर क्षेत्र की बैरक संख्या-चार से खोदी गई थी। आरंभ में यह सुरंग करीब 42 फुट की बताई गईं। हालांकि बाद में इसकी लंबाई 213 मीटर तक होने की बात सामने आई। यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी चाहते तो सुरंग के रास्ते आराम से फरार हो सकते थे। आरोपी पिछले कई महीनों से सेंध लगाने में लगे थे। खुदाई में निकलने वाली मिट्टी को बैरक के पास की क्यारियों में बिछा देते थे। इतने पर भी जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।
न सिर्फ दबाया मामला, सुरंग भी की थी बंद :
आरंभ से ही जेल प्रशासन शंका के दायरे में था। बम कांड के आरोपियों ने फरार होने के मंसूबे से जेल में सुरंग खोदी है। इसकी भनक लगने के बाद अधीक्षक के निर्देश पर जेलरों ने सुरंग को बंद करने का प्रयास किया । एक सजायाफ्ता कैदी को सुरंग के अंदर उतार कर बीच में पत्थर लगवा दिया ताकि सुरंग मामले की गंभीरता न सामने आ सके।
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