तीस्ता सीतलवाड की फाइल फोटो
अहमदाबाद/नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुलबर्ग सोसायटी फंड में कथित हेराफेरी के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड को फौरी राहत दी है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर गुरुवार को एक दिन के लिए रोक लगा दी है। शीर्ष कोर्ट शुक्रवार को सीतलवाड, उनके पति जावेद आनंद और चार अन्य अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। सीतलवाड के वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अगुवाई वाली बेंच के सामने मौखिक रूप से इस मामले का उल्लेख किया था।
इसके कुछ देर पहले ही गुजरात हाईकोर्ट ने सीतलवाड सहित अन्य की जमानत याचिकाएं रद्द कर दी थीं। जमानत याचिका रद्द होने के तुरंत बाद गुजरात पुलिस सीतावाड और उनके पति को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पहुंच गई थी। ये दोनों मुंबई के जुहू इलाके में रहते हैं। उधर, गुजरात दंगा पीडितों की मदद की लड़ाई लड़ने वाली सीतलवाड का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने किसी तरह का गबन या हेराफेरी नहीं की है।
पहली नजर में आरोप सही लगते हैं : हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला ने शुक्रवार को ही जमानत याचिकाएं रद्द करते हुए कहा कि पहली नजर में आराेप सही लगते हैं। सीतलवाड, उनके पति और अन्य ने दंगा पीड़ितों के लिए आई रकम को निजी कामों में इस्तेमाल किया है। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
स्मारक के लिए इकट्ठी हुई थी रकम, विदेश घूमने में खर्च दी :
दंगाइयों ने 28 फरवरी 2002 में गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था। इसमें करीब 69 लोग मारे गए थे। मारे गए लोगों की याद में सोसायटी में स्मारक बनाने के लिए वहीं के लोगों ने सीतलवाड की अगुवाई में 1.51 करोड़ रुपए जमा किए थे। लेकिन स्मारक बनाने की योजना रद्द कर दी गई। आरोप है कि इन पैसों से तीस्ता ने पाकिस्तान, अबुधाबी, कूवैत, स्विट्जरलैंड, यूएई जैसे देशों की यात्रा की। यही नहीं, निजी ऑनलाइन खरीदी में भी इन पैसों का इस्तेमाल किया। इसके बाद सोसायटी के ही 12 लोगों ने सीतलवाड अन्य के खिलाफ गबन का आरोप लगाया था। गुजरात पुलिस ने पिछली जनवरी में मामला दर्ज किया था।