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इस प्रोफेसर ने की थी देश की 780 भाषाओं और बोलियों की खोज

Dainik Bhaskar

Nov 04, 2017, 04:38 AM IST

अंग्रेजी साहित्य पढ़ाने वाले गणेश नारायणदास देवी 1997-98 में गुजरात के आदिवासी गांव में पहुंच गए।

गणेश नारायणदास देवी। (फाइल फोटो) गणेश नारायणदास देवी। (फाइल फोटो)
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वडोदरा. वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी साहित्य पढ़ाने वाले गणेश नारायणदास देवी 1997-98 में गुजरात के आदिवासी गांव में पहुंच गए। वहां आदिवासियों से मिले। उनकी भाषा और बोली को समझा और उनके लिए उनकी ही भाषा में एक जर्नल छापा। एक-एक जर्नल तब 10 रुपए में बिका। कुल 700 कॉपी प्रकाशित की गई थीं और आदिवासियों का उत्साह देखते ही बनता था। कई आदिवासी निरक्षर थे, लेकिन अपनी भाषा को किसी कागज पर छपा देखकर उन लोगों की आंखें छलक उठीं।


क्यों चर्चा में- इन्होंने देश की कई बोलियों की खोज की है।

बस उनकी खुशी के आंसुओं में गणेश देवी को अपना लक्ष्य मिल गया। उन्हें समझ में आया कि भाषा में कितनी ताकत होती है। धीरे-धीरे उन्होंने देश की तमाम भाषाओं को सहेजना शुरू किया। अपनी एक टीम बनाई, जिसमें करीब 3500 लोग हैं।


2010 में उन्होंने आधिकारिक तौर पर पीपुल लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया का काम शुरू किया। पहले दो वर्ष संगठन का हर व्यक्ति देश के सुदूर ग्रामों का दौरा करने गया और वहां की भाषाओं को समझा और अपने अनुभव का एक ब्योरा बनाया। यह देखने में आया कि पिछले 50 वर्षों में कई बोलियां समाप्त हो चुकी हैं। आजादी के बाद से 300 भाषाओं का पता ही नहीं है। 97 बोलियां तो खत्म होने की कगार पर हैं। यह भी अनुभव हुआ कि हिमाचल प्रदेश की कई बोलियों में महज बर्फ के लिए 200 शब्द हैं। और तो और महाराष्ट्र के कई गावों में प्रचलन से बाहर हो चुकी पुर्तगाली बोली जाती है। इन्होंने ही अपने सर्वे के बाद बताया कि छोटे से अरुणाचल प्रदेश में देश में सर्वाधिक मातृभाषाएं हैं।

पूरे देश में 1961 की जनगणना में 1652 मातृभाषाएं थीं तो 10 साल बाद हुई जनगणना में मात्र 108 ही बताई गई। इसका कारण यह है कि सरकार ने कहा कि उन भाषाओं का खुलासा न करे, जो दस हजार से कम लोग बोलते हैं।


अपने कार्य के लिए उन्हें 26 जनवरी 2014 को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। साहित्य अकादमी पुरस्कार पहले ही मिल गया था। लेकिन 2015 में उन्होंने अन्य लेखकों के समर्थन में साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस कर दिया। इसके बाद उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उनसे पुरस्कार वापस करने के बारे में पूछा था।

गणेश नारायणदास देवी। (फाइल फोटो) गणेश नारायणदास देवी। (फाइल फोटो)
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