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वनिता कॉलेज में छात्रा का उत्पीड़न प्रोफेसर के वेतन से बच्चों की फीस भर दबा दिया मामला

4 वर्ष पहले
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सूरत. वनिता विश्राम वुमन कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर छेड़खानी के मामले में कार्रवाई का उदाहरण आया है, वह अलग तरह का है। फूड एंड न्यूट्रिशियन विभाग के प्रोफेसर ने एक छात्रा को मैसेज किए थे। छात्रा ने मामा को बताया तो मामा ने ट्रस्ट को शिकायत की। वुमन सेल के सामने प्रोफेसर ने गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद दंड के रूप में प्रोफेसर की डेढ़ लाख रुपए सैलेरी से गरीब बच्चों की स्कूल फीस भरवाई और उसकी पत्नी-बेटे के सामने गलती कबूल करवाई गई। उसने अपने बेटे को भी कहा वह हमेशा महिलाओं की इज्जत करे और जीवन में कभी उसकी जैसी गलती न करने की कसम दिलाई। स्टाफ के सामने भी गलती कबूल की। कॉलेज ने एक फार्म बनाकर कॉलेज के सभी स्टूडेंटस में बंटवा कर सर्वे करवाया कि उन्हें कोई टीचर परेशान तो न नहीं करता। कॉलेज की प्रिंसिपल अभिलाषा अग्रवाल का कहना है कि मामला खत्म हो चुका है, अब हमें कुछ नहीं कहना।
 
भास्कर को कहा- मेरी डायरेक्टर से बात हो गई है, कोई कार्रवाई नहीं होगी 
- भास्कर रिपोर्टर ने जब रमेश से डायरेक्टर सीआर गांधी के पास इतनी संख्या में कर्मचारियों को ले जाने के बाद में पूछा तो उसने कहा कि वह कर्मचारियों की सैलेरी और अलाउंस बढ़ाने की मांग लेकर गया था। इस मामले में वे कोर्ट से जीतने वाले हैं, इसलिए उन्हें मैनेजमेंट झूठे मामले में फंसा रहा है। इसके खिलाफ वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। डायरेक्टर से बात हो गई है कि कोई कार्रवाई नहीं होगी।
 
कमेटी की मेंबर गीता श्रॉफ ने कहा : एक हफ्ते में जांच कर देंगे फैसला
- वुमन कमेटी की मेंबर गीता श्राॅफ ने कहा है कि हमने रमेश को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भिजवाया था, लेकिन नोटिस पर किसी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर और लिफाफे पर उसका नाम नहीं होने पर उसने लेने से मना कर दिया। शुक्रवार को उसे बुलाया, लेकिन उसने नोटिस नहीं लिया, हालांकि नोटिस रिसीव के हस्ताक्षर कर लिए। यूनियन के कर्मचारियों की भीड़ लेकर आने से हम प्रभावित होने वाले नहीं हैं। मंगलवार को फिर से मीटिंग रखी जाएगी और उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। कमेटी एक हफ्ते में जांच कर फैसला सुना देगी। कमेटी किसी के भी प्रभाव में नहीं आने वाली है।
 
भास्कर को कहा- मेरी डायरेक्टर से बात हो गई है, कोई कार्रवाई नहीं होगी 
भास्कर रिपोर्टर ने जब रमेश से डायरेक्टर सीआर गांधी के पास इतनी संख्या में कर्मचारियों को ले जाने के बाद में पूछा तो उसने कहा कि वह कर्मचारियों की सैलेरी और अलाउंस बढ़ाने की मांग लेकर गया था। इस मामले में वे कोर्ट से जीतने वाले हैं, इसलिए उन्हें मैनेजमेंट झूठे मामले में फंसा रहा है। इसके खिलाफ वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। डायरेक्टर से बात हो गई है कि कोई कार्रवाई नहीं होगी।
 
कमेटी की मेंबर गीता श्रॉफ ने कहा : एक हफ्ते में जांच कर देंगे फैसला
वुमन कमेटी की मेंबर गीता श्राॅफ ने कहा है कि हमने रमेश को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भिजवाया था, लेकिन नोटिस पर किसी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर और लिफाफे पर उसका नाम नहीं होने पर उसने लेने से मना कर दिया। शुक्रवार को उसे बुलाया, लेकिन उसने नोटिस नहीं लिया, हालांकि नोटिस रिसीव के हस्ताक्षर कर लिए। यूनियन के कर्मचारियों की भीड़ लेकर आने से हम प्रभावित होने वाले नहीं हैं। मंगलवार को फिर से मीटिंग रखी जाएगी और उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। कमेटी एक हफ्ते में जांच कर फैसला सुना देगी। कमेटी किसी के भी प्रभाव में नहीं आने वाली है।
 
छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले दो प्रोफेसर हुए थे सस्पेंड
 
सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दो साल पहले 5 फरवरी 2015 में छात्रा के साथ छेड़खानी के आरोप दो प्रोफेसरों डॉ. रंजीत राय और डॉ. विवेकानंद मिश्रा पर लगे थे। तब छात्रा को न्याय दिलवाने के लिए रमेश ने आंदोलन की अगुवाई की थी। हजारों स्टूडेंट्स आंदोलन में शामिल हुए। करीब सात महीने बाद हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों प्रोफेसरों को निलंबित किया गया था। इसके बाद हर छोेटे बड़े मामले में हंगामा कर रमेश मैनेजमेंट पर दबाव बनाता गया। फिर उसके खिलाफ ही 20 से ज्यादा शिकायतें हो गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
 
वुमन कमेटी की प्रमुख छुट्‌टी पर, डायरेक्टर ने बात करने से मना किया
डायरेक्टर गांधी ने शुक्रवार को भी इस मामले में बात करने से मना कर दिया। दूसरी तरफ वुमन कमेटी की प्रमुख यूडी दलाल अभी छुट्टी पर हैं, जांच भी अागे नहीं बढ़ पाई है। रमेश से तो पूछताछ तक नहीं हो पाई है।
 
 
 
 
 
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