(फोटो: आरती और डॉ.सुधीर मिश्रा)
सूरत (गुजरात)। सूरत की छह वर्षीय आरती के मामले में डॉक्टर सच में भगवान का रूप ही साबित हुए। आरती का पूरा शरीर पैरालिसिस का शिकार था। इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते उसके माता-पिता भी बेटी के ठीक होने की उम्मीद खो चुके थे। डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। सालभर से अधिक चले उपचार का परिणाम था कि अब आरती सामान्य बच्चों की भांति चल फिर सकती है।
आरती लुलेइन बारी सिन्ड्रोम नामक बीमारी का शिकार थी। यह मर्ज प्रति एक लाख बच्चों में से एक अथवा दो में होता है। रोग की चपेट में आने से रोगी के नर्वस सिस्टम में संRमण हो जाता है। इससे शरीर पैरेलिसिस का शिकार हो जाता है। आरती रोग के असर से मौत के मुंह तक पहुंच गई थी। डॉक्टरों के योजनाबद्ध उपचार ने उसे नया जीवन दिया है। डॉ. सुधीर मिश्रा ने कहा कि आरती सामान्य बच्चों की भांति जीवन जी सके, इतनी सक्षम हो गई है। हमारी टीम को इस बात का संतोष है कि एक बच्ची को पूर्ण स्वस्थ कर उसके माता-पिता को सौंपा है।
सितंबर 2011 को आरती अनिल मौर्या का शरीर पैरेलिसिस का शिकार हो गया था। कोई बाहरी अंग काम नहीं करता था। अस्पताल की मेडिकल टीम ने इलाज की पूरी प्लानिंग बनाई। पहले दो पखवाड़े करवट बदलने और इसके बाद बैठाने का क्रम शुरू किया। घुटने में पट्टी लगाई और इसके आधार पर आरती को खड़े होने का सहारा दिया। तीन महीने बाद वॉकर की मदद से चलाने का अभ्यास कराया। इसके बाद हाथों की बैसाखी से चलना सिखाया। छह महीने बाद वैसाखी और पैर में लगी पट्टियां हटा दीं। एक महीने तक स्वतंत्रत रूप से फिर चलवाया गया। अब आरती खुद चल फिर सकती है।