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आसाराम की विकृति ‘पीडोफीलिया’? जानें, कैसे और क्यों होते हैं बच्चे शिकार

आमतौर पर सबसे ज्यादा मामले पश्चिमी देशों में सामने आते हैं, लेकिन अब यह समस्या हमारे देश में भी दिखाई देने लगी है।

Danik Bhaskar | Oct 03, 2013, 12:05 AM IST
अहमदाबाद। जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद आसाराम की ओर से पेश जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मंगलवार को न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आसाराम बच्चों का यौन शोषण करने की बीमारी ‘पीडोफीलिया’ से ग्रसित हैं। इस संबंध में एक चिकित्सक का प्रमाण पत्र भी पेश किया गया।
खैर यह तो हो गई आसाराम की बात, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘पीडोफीलिया’ नामक यह बीमारी आखिर है क्या और इसके लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं..। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह एक खतरनाक मानसिक बीमारी है, जिससे ग्रसित रोगी को बच्चों से सेक्स करने या उन्हें तकलीफ पहुंचाने की तीव्र इच्छा होती है।
अगली स्लाइडों पर पढ़ें, इस बीमारी के कारण और चिकित्सकों की राय...
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आमतौर पर सबसे ज्यादा मामले पश्चिमी देशों में सामने आते हैं, लेकिन अब यह समस्या हमारे देश में भी दिखाई देने लगी है। इस बारे में मनोचिकित्सक कहते हैं कि अधिकतर सामाजिक स्तर पर अच्छा रुतबा रखने वाले लोग ही इस रोग के शिकार होते हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जाता है कि ऐसे व्यक्तियों को समाज और कानून का डर नहीं रहता, क्योंकि पैसे और उनकी प्रसिद्धि उन्हें इस तरह के आरोपों से बचा ले जाती है। दरअसल समाज में ऐसे लोगों को इतना नाम होता है कि आमतौर पर लोग उन पर शक नहीं करते। इसी बात से बच्चे भी डर जाते हैं और चुप रहते हैं। 

 

 

 

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मनोचिकित्सकों के अनुसार, यह एक भयंकर मानसिक बीमारी है और इससे ग्रस्त लोग बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं। कई मामलों में तो ऐसे लोग बच्चों से बलात्कार कर उनकी हत्या तक कर देते हैं। पश्चिमी देशों में ऐसे रोगियों की संख्या काफी ज्यादा है। अधिकतर टूरिस्ट तो बच्चों से सेक्स करने के लिए अन्य देशों की यात्रा भी करते हैं। इसी की वजह से चाइल्ड सेक्स का नेटवर्क तेजी से हर देश में बढ़ता जा रहा है।

 

 

 

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इस मामले में गुजरात के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. प्रकाश शाह बताते हैं कि ‘पीडोफीलिया’ से पीड़ित व्यक्ति बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स को देखते रहते हैं। जब भी उन्हें मौका मिलता है तो वे किसी न किसी तरह बच्चों के अंगों को स्पर्श करते हैं। ऐसा करने में भी उन्हें काफी मजा आता है। इसके अलावा ऐसे मरीज बच्चों से अपने प्राईवेट पार्ट्स को स्पर्श कराते हैं या फिर उनसे ओरल सेक्स भी करवाते हैं।

 

 

 

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इसी तरह एक मनोचिकित्सक और सेक्सोलॉजिस्ट ने हमें दो घटनाएं बताईं..एक बार उनके पास ऐसा मामला सामने आया था कि एक 13 साल का किशोर अपने अंकल से मिलने की रट लगाए हुए था। जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि अंकल उसके सामने ही अपने कपड़े बदलते और सेक्सी बातें किया करते थे। इसके अलावा वे किशोर को अपने प्राईवेट पार्ट बताकर स्पर्श भी करवाया करते थे। अचानक एक दिन यह बात किशोर के पिता को मालूम हो गई और उन्होंने मनोचिकित्सक से संपर्क किया।

 

 

 

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ऐसे ही एक दूसरे मामले में..एक बार ‘पीडोफीलिया’ से पीड़ित व्यक्ति उनके पास आया था। इस व्यक्ति ने बताया कि उसे बच्चे बहुत पसंद हैं और वह अक्सर उनसे शारीरिक संबंध बनाने और ओरल सेक्स के बारे में सोचता रहता है। पीड़ित ने बताया कि बच्चों को देखते ही उसके दिमाग में अजीब से हलचल होने लगती है। हालांकि यह पीड़ित व्यक्ति की यह समस्या शुरुआती थी। इसलिए मनोचिकित्सक ने उसकी मानसिक स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

 

 

 

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‘पीडोफीलिया’ का कारण :
 
ऐसे रोगी बच्चों को ही अपना शिकार क्यों बनाते हैं.. इस मामले में डॉक्टर शाह कहते हैं कि आमतौर पर ऐसे रोगी वे लोग होते हैं, जिनका बचपन मुश्किल भरे समय में बीता हो। या फिर उन्हें बचपन में कभी किसी का प्यार न मिला हो। ऐसे में वे बचपन में ही दूसरे खुशहाल बच्चों को देखकर हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं। यह समस्या धीरे-धीेरे बढ़ती जाती है और ‘पीडोफीलिया’ का रूप ले लेती है। 
 
सिर्फ इतना ही नहीं, कई बार रोगी का मस्तिष्क इतना विकृत हो जाता है कि उन्हें बच्चों को तकलीफ देने में मजा आने लगता है। ऐसे में रोगी बच्चों की नृशंस हत्या तक कर देता है और इसका भी आनंद उठाता है। ऐसे मामलों में अगर पीड़ित कोई किशोरी या बच्ची रही हो तो उसके लिए यह समस्या बड़ी उम्र में बहुत खतरनाक साबित होती है।
 

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पीड़ित बच्ची जब जवानी की उम्र में पहुंचती है तो वह खतरनाक स्थिति में होती है। क्योंकि ऐसी लड़कियां बचपन में ही मानसिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। शादी के बाद जब पति उन्हें स्पर्श करता है तो वे अंदर ही अंदर बहुत घबरा जाती है और ऐसे में उसकी योनि बहुत संकुचित हो जाती है और इंटरकोर्स बहुत तकलीफदेह होता है। ऐसे में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है और युवती की शारीरिक हालत बिगड़ जाती है।

 

 

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ऐसा नहीं है कि इस रोग के शिकार सिर्फ पुरुष ही होते हैं। आंकड़ों के अनुसार महिलाओं में भी यह समस्या पुरषों के समकक्ष ही है। अधिकतर मामलों में देखा गया है कि इस रोग से ग्रसित महिलाओं को नाबालिग किशोरों से सेक्स करने में आनंद मिलता है। आमतौर पर ऐसी महिलाएं किशोरों से गुदा मैथुन या ओरल सेक्स करवाती हैं। ऐसी महिलाएं 12 से 15 वर्ष के किशोरों को ही चुनती हैं, क्योंकि यह अवस्था किशोर के लिए यौवनवस्था की शुरुआत होती है और यह यह उन्हें भी पसंद आता है।

 

 

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इस मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़ें वर्तमान में महिलाओं को लेकर आ रहे हैं। हालांकि इसके पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि किशोर वय के बच्चों से सेक्स करने की श्रेणी में सिर्फ ‘पीडोफीलिया’ के मरीज ही नहीं आते। बल्कि अधिकतर महिलाएं किशोरों को इसलिए चुनती हैं कि वे उनसे अपने मनमाफिक सेक्स क्रियाएं करवा लेती हैं। अधिकतर महिलाएं ऐसी होती हैं जो अपनी पंसदीदा सेक्स क्रियाएं अपने साथी को स्पष्ट रूप से बता नहीं पातीं, जबकि किशारों से वे ऐसा सबकुछ आसानी से करवा लेती हैं।

 

 

 

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दुष्परिणाम :
 
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बच्चों के देह-व्यापार का जाल अब पूरी दुनिया में तेजी से फैलता जा रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा मार गरीब देशों के बच्चों पर पड़ रही है। यहां से या तो बच्चे अच्छी रकम देकर उनके माता-पिता से खरीद लिए जाते हैं या फिर चोरी करवाएं जाते हैं। यानी की ‘ह्युमन ट्रैफिकिंग’। 
 
इतना ही नहीं, भारत के कई शहरों में भी चाइल्ड सेक्स रैकेट फैला हुआ है। देश में ऐसे अमीर लोगों की कमी नहीं है, जो इस तरह के व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी के चलते बिचौलियों के जरिए बाल देह का कारोबार पूरी तरह से फल-फूल रहा है।
 
 

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उपचार :
 
ऐसा नहीं है कि यह लाइलाज बीमारी है। इसका उपचार मनोचिकित्सक या सेक्सोलॉजिस्ट बहुत आसानी से कर सकते हैं। बशर्ते, ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें मनोचिकित्सक या सेक्सोलॉजिस्ट तक ले जाया जाए। या फिर ऐसे मरीज खुद उनसे संपर्क करें।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मनोचिकित्सक इस समस्या का उपचार सिर्फ 6 महीनों में ही केमिकल कोलेस्ट्रोशन से कर सकते हैं। ब्रिटेन में तो इसके लिए 1987 में बाकायदा हेल्पलाइन भी शुरू की गई थी। यहां चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि हेल्पलाइन शुरू होने के गिनती के ही दिनों में लगभग 52 हजार फोन कॉल्स आए थे।
 
 

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याद रखें...
 
यह एक घृणित और विकृत मानसिकता वाली समस्या है। अगर इस पर समय रहते ही नियंत्रण नहीं पाया गया तो संबंधित व्यक्ति का पूरा जीवन नर्क बना सकती है। इस तरह की मानसिकता वाले व्यक्तियों को स्वत: ही मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा अगर आपको इस तरह के मरीज नजर आते हैं तो उसके उपचार की भी कोशिश करें, जिससे कि उसके साथ-साथ मासूमों की भी जिंदगियां बचाई जा सकें।
 
 

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