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डाउनलोड करेंकठियावाड (गुजरात)। यह बात आजादी के पहले की है। जब देश में राजा-रजवाड़ों का शासन था। दूसरी तरफ भारत की संपत्ति व संपदा लूटने में अंग्रेज कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। इतना ही नहीं, अपने स्वार्थ के लिए देश के कई राजा-रजवाडे भी अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को लूट रहे थे और जनता अनकों तरह की यातनाएं भुगतते हुए भूखी-प्यासी मर रही थी। इस समय चारों ओर सिर्फ लूटपाट का ही नगाड़ा बज रहा था।
यह 1940 का दशक था़, जब वडोदरा के शासक गायकवाड परिवार को एक चिट्ठी मिलती है, जिसमें पूरे परिवार को धमकी लिखी थी..‘महल में काम करने वाले सभी 42 नौकरों को उनकी सेवानिवृत्ति के समय पांच-पांच वीघा जमीन दी जाए और ऐसा करते समय इसकी सूचना पूरे शहर में भी जाहिर की जाए। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो परिवार के सभी सदस्यों की एक-एक कर हत्या कर दी जाएगी।’ इस धमकी भरे पत्र के नीचे नाम लिखा था.. भूपत सिंह चौहाण। यह वही भूपत सिंह था, जिसने वडोदरा से लेकर दिल्ली की सरकार तक की नाक में दम कर रखा था।
इंग्लैंड के रॉबिनहुड या हिंदी फिल्मों की तरह लगने वाली यह कथा एक सच्ची घटना है। भूपत सिंह के कहर से जहां राजा-रजवाड़े और अंग्रेज कांपा करते थे, वहीं गरीबों के दिल में उसके लिए सर्वोच्च स्थान था।
आगे पढ़ें, भूपत सिंह का इतिहास कि कैसे वह पाकिस्तान पहुंचकर बन गया मुसलमान...
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