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देशभर के व्यापारियों ने खुद को वोट बैंक में बदलने की कवायद शुरू की

8 वर्ष पहले
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गांधीनगर। लोकसभा चुनाव में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने के लिए देशभर के व्यापारियों ने खुद को वोट बैंक में बदलने की कवायद शुरू कर दी है। सभी व्यापारियों को लामबंद करने के लिए व्यापारी नेता विभिन्न राज्यों के सघन दौरे कर रहे हैं। व्यापारियों के शीर्ष संगठन कन्फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आगामी 27 -28 फरवरी को नई दिल्ली में राष्ट्रीय व्यापारी महाधिवेशन बुलाया है।
इसका उद्घाटन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। सम्मेलन में शिरकत के लिए मोदी के अलावा, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने रजामंदी दी है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि महाधिवेशन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित देश के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया जा रहा है। इनमें भाजपा, कांग्रेस, जदयू, माकपा, भाकपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, शिवसेना, अकाली दल, तेलुगुदेशम, तृणमूल कांग्रेस, राजद, सपा, बसपा, आदि शामिल हैं । महाधिवेशन में सभी नेताओं को एक ‘व्यापारी चार्टर’ देकर रुख स्पष्ट करने कहा जाएगा। महाधिवेशन में बड़ी संख्या में महिला उद्यमी भी भाग लेंगी।
भरतिया और खंडेलवाल ने इस तथ्य पर अफसोस जताया कि आजादी से अब तक देश की राजनैतिक व्यवस्था ने व्यापारी वर्ग की गहरी उपेक्षा की है। देशभर के 6 करोड़ से ज्यादा व्यापारी साल भर में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार करते हैं। वे राष्ट्रीय जीडीपी में 15 फीसदी योगदान देते हैं। इसके बावजूद किसी भी सरकार या राजनैतिक दल ने व्यापारी वर्ग को प्राथमिकता पर नहीं रखा है।
व्यापारियों की समस्याएं :
- बहुस्तरीय और जटिल कर प्रणाली
- राष्ट्रीय व्यापार नीति का न होना
- बैंकिंग सेक्टर से वित्तीय सहायता न मिलना
- छोटे व्यापारियों को खत्म करने की नीतियां
- रिटेल व्यापार में एफडीआई