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ऐसी शख्सियत, जिसने भारतीयों को अपनी कमर सीधी करना सिखाया...

7 वर्ष पहले
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‘गांधी जी ने अपना नेतृत्व प्रदान कर भारतीय जनता को अपनी कमर सीधी करना सिखाया। आंखें ऊपर उठाना सिखाया तथा अवचिल दृष्टि से परिस्थितियों का सामना करना सिखाया।’
- विस्काउन्ट सेमुअल ( विश्व विख्यात केमिस्ट और न्यूरो बायोलॉजिस्ट)

गांधीनगर। महात्मा गांधी को भारत ही नहीं अपितु समूचे विश्व ने क्यों माना? इसके पीछे कोई गूढ़ रहस्य नहीं था, बल्कि उन्होंने आम आदमी के पास जो सहज-सुलभ चीज होती है, उसी को अपने आंदोलन की ताकत बनाया। बापू के अहिंसा और सत्याग्रह के ताकत की कल्पना ताकतवर ब्रितानी सरकार ने भी नहीं की थी। महात्मा गांधी के इन अहिंसक हथियारों ने अपना असर दिखाया और ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ो को हिलाते हुए अंतत: भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करा दिया। अंग्रेजों ने अपनी हार का बदला देश के टुकड़े करके तो ले लिया, लेकिन बापू के शस्त्रों...सत्य और अहिंसा के वे भी कायल हो गए। परमाणु बमों और बारूद की ताकत को अपनी शक्ति मानने वाले देश भी आज कहीं न कहीं बापू के सिद्धांतों से प्रेरित हैं।

महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद्र और माता का नाम पुतलीबाई था। अपने परिवार में सबसे छोटे बापू की एक सबसे बड़ी बहन और दो बड़े भाई थे। इसमें सबसे बड़ी बहन रलियत, फिर भाई लक्ष्मीदास और भाभी नंद कुंवरबेन, भाई कृष्णदास और भाभी गंगा थीं।

आज ही के दिन यानी कि 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालांकि इस दिन बापू के शरीर ने तो दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके कार्य, सादगी, दूरदर्शिता, प्रेमभाव, सिद्धांत... आज भी पूरी दुनिया को राह दिखाते हैं।


इसी मौके पर पेश है, बापू के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें...