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डाउनलोड करेंअहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट बहुचर्चित इशरत जहां एनकाउंटर मामले की अब निगरानी नहीं करेगा। न्यायाधीश जयंत पटेल एवं अभिलाषा कुमारी की पीठ ने शुक्रवार को यह व्यवस्था दी। आदेश में कहा कि प्रस्तुत मामले में सीबीआई ने अपना आरोप पत्र पेश कर दिया है।
इसलिए इस केस में अब भूमिका ट्रायल कोर्ट की आती है। ऐसे संयोग में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को ध्यान में लिया जाए तो एक मामले की निगरानी दो कोर्ट द्वारा नहीं की जा सकती। इसलिए अब इस केस की निगरानी बंद की जाती है। यह भी कहा कि केस से जुड़े प्रभावित अथवा अन्य किसी पक्षकार को कोई शिकायत है तो वह निचली अदालत के समक्ष अपनी बात रख सकता है।
जून 2004 के इस बहुचर्चित मामले की जांच की निगरानी हाईकोर्ट कर रहा था। हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस बिंदु की जांच की कि एनकाउंटर फर्जी था अथवा नहीं। एसआईटी ने एनकाउंटर के फर्जी होने की राय जताई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। तत्पश्चात साल 2011 में मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द की गई।
जेटली-झा के खिलाफ अवमानना मामलों में फैसला सुरक्षित :
भाजपा नेता अरुण जेटली एवं आईपीएस मोहन झा के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। जेटली पर ब्लॉग में सीबीआई की भूमिका पर आपत्तिजनक टिह्रश्वपणी करने एवं जांच एजेंसी को केन्द्र सरकार का मोहरा बताने सहित आरोप लगाए गए हैं। इसी प्रकार एसआईटी के सदस्य रहे आईपीएस मोहन झा के खिलाफ पुलिसकर्मी मोतीभाई देसाई को इशरत केस में धमकाने एवं सतीष वर्मा, एसआईटी के दूसरे सदस्य के खिलाफ अर्जी करने के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। इन मामलों में क्रमश: जेटली एवं झा के खिलाफ अदालत की अवमानना की अर्जी हुई थी। अदालत ने दोनों मामलों में फैसला सुरक्षित रखा है।
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