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गुजरात दंगों के बाद से वीरान पड़ी है यह बस्ती, मकानों के लिए खरीदार तक नहीं

9 वर्ष पहले
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अहमदाबाद। पूर्वी अहमदाबाद की बहुचर्चित गुलबर्ग सोसायटी गुजरात दंगों के बाद से उजा़ड़ है। साल 2002 में सांप्रदायिक दंगों के समय हुए गुलबर्ग कांड के बाद से यहां कोई रहता नहीं है। पीड़ितों के मकान खाली पड़े हैं, खंडहर से हो गए हैं।
जबकि अहमदाबाद जैसे महंगे शहर, जहां प्रॉपर्टीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, के बावजूद जैसे कोई इस बस्ती के मकान खरीदना ही नहीं चाहता। कारण साफ है कि इस बस्ती से एक दर्दनाक याद जुड़ी हुई है।
हालांकि यहां के बाशिंदे जो अब अन्या इलाकों में रह रहे हैं, वे यहां स्थित अपने आशियाने बेच सकेंगे। अब सोसायटी ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि सदस्य किसी भी जाति-धर्म के लोगों के साथ इनके सौदे करने के लिए स्वतंत्र हैं।
गुलबर्ग सोसायटी में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोग दंगाइयों के उपद्रव में मारे गए थे। सोसायटी के चेयरमैन सलीम संघी कहते हैं कि अभी यहां म्यूजियम बनाने को लेकर विवाद था, जो अब सुलझ गया है। जिसे मकान बेचना है वह बेच सकता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि अभी बाजार ऊंचा है। इसलिए एक साथ सौदा होता तो लोगों (सदस्यों) को फायदा होता लेकिन अब लोग अपनी मर्जी के हिसाब से व्यक्तिगत स्तर पर सौदे कर सकेंगे।