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भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत ‘द्वारकानगरी’ के भव्य नजारे, देखें तस्वीरें...

7 वर्ष पहले
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कठियावाड (गुजरात)। भारत की पश्चिम दिशा में हिंदू धर्म के चारों धामों में से एक द्वारका धाम है। यह गुजरात प्रदेश के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के द्वीप पर स्थित है। द्वारका का धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मथुरा छोड़ने के बाद अपने परिजनों एवं यादव वंश की रक्षा हेतु भगवान श्रीकृष्ण ने भाई बलराम तथा यादववंशियों के साथ मिलकर द्वारकापुरी का निर्माण विश्वकर्मा से करवाया था। यदुवंश की समाप्ति और भगवान श्रीकृष्ण की जीवनलीला पूर्ण होते ही द्वारका समुद्र में डूब गई मानी जाती है। इस क्षेत्र का प्राचीन नाम कुशस्थली था। धार्मिक दृष्टि से द्वारका को सप्तपुरियों में गिना जाता है।

वर्तमान में स्थित द्वारका, गोमती द्वारका के नाम से जानी जाती है। यहां आठवीं शताब्दी में सनातन धर्म की रक्षा और प्रसार के लिए आदि शंकराचार्य ने द्वारकापीठ की स्थापना की थी। आधुनिक खोजों में भी इस क्षेत्र में रेत एवं समुद्र के अंदर से प्राचीन द्वारका के अवशेष प्राप्त हुए हैं। द्वारका की स्थिति एवं बनावट समुद्र के बीच द्वीप पर बने किले के समान है। वर्तमान में गोमती द्वारका और बेट द्वारका एक ही द्वारकापुरी के दो भाग हैं। गोमती द्वारका में ही द्वारका का मुख्य मंदिर है, जो श्री रणछोड़राय मंदिर या द्वारकाधीश मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

यह मंदिर लगभग 1500 वर्ष पुराना है। मंदिर सात मंजिला है। इस मंदिर के आस-पास बड़े हिस्से मे जल भरा है। इसे गोमती कहते हैं। इसके आस-पास के कई घाट हैं। जिनमें संगम घाट प्रमुख है। मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज या झंडा विश्व की सबसे बड़ा ध्वज माना जाता है। इस मंदिर में भगवान की काले रंग की चार भुजाओं वाली मूर्ति है। इसके अतिरिक्त मंदिर के अलग-अलग भागों में अन्य देवी-देवताओं के मंदिर एवं मूर्तियां स्थित है। मंदिर के दक्षिण में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित शारदा मठ भी है।


आगे पढ़ें, द्वारका नगरी की रोचक कथा मनमोहक तस्वीरों के साथ...