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डाउनलोड करेंअहमदाबाद। हमारे समाज में स्त्रियों को सम्मान देने की अनेक टिपिकल चर्चाएं अक्सर होती रहती हैं। शास्त्रो-ग्रंथों आदि में भी पुरुषों से ज्यादा स्त्रियों के हर पहलू पर चर्चा हुई है। महापुरुष हो या संत, वे भी स्त्रियों के बारे में बोलते ही हैं। लेकिन इस मामले में ओशो की अलग ही विचारधारा थी।
क्रांतिकारी विचारों के जनक और संभोग जैसे विषय को समाधि तक से जोड़ने वाले ओशो जब महिलाओं के बारे में अपने विचार रखते हैं, तो यहां पर भी कई रोचक विचारों का जन्म होता है।
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