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3 लाख रुपए की पटोला साड़ी को मिला पेटेंट, अब नहीं हो सकेगी नकल

7 वर्ष पहले
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(गत वर्ष अगस्त में लैक्मे फैशन वीक-मुंबई के दौरान एक्ट्रेस किरण खेर पटोला साड़ी में कैटवॉक करते हुए।)
महेसाणा (गुजरात)। उत्तर गुजरात के पाटण की विख्यात हस्तकला उत्पाद 'पटोला' साड़ी को जिओग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) रजिस्ट्रेशन मिल गया है। अब इसकी नकल नहीं की जा सकेगी। "डब्ल्यूटीओ" से जुड़े दुनिया के 160 देशों में यह व्यवस्था लागू होगी। पाटण स्थित "रानी की वाव' को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने के बाद यह दूसरा मौका है, जब पाटण के इस हस्तकला उत्पाद को वैश्विक मंच पर विशेष पहचान मिली है। 'पटोला' हाथ से तैयार एक प्रकार की साड़ी है, यह 900 साल पुरानी हस्तकला है। इसकी कीमत डेढ़ से तीन लाख रुपए तक होती है। इस हस्तकला को यूनेस्को की इंटेंजिबल कल्चरल वर्ल्ड हैरिटेज की सूची में 2009 में नॉमिनेशन मिल चुका है। 2002 में भारत सरकार ने 'पटोला' पर पांच रुपए का डॉक टिकट भी जारी किया था।
पाटण डबल ईकट 'पटोला' वीवर्स एसोसिएशन के सचिव अशोकभाई पटोलावाला ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 'पटोला' साड़ी को जिओग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रेशन नंबर-195 मिल गया है। अब इसकी नकल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। दोषी को तीन साल की जेल और दो लाख रुपए तक का दंड हो सकता है।

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