महेसाणा (गुजरात) . गुजरात के रामचरण इंदौरा ने एकाकीपन से जूझने के लिए पुनर्विवाह किया। उनकी दूसरी जीवनसंगिनी बनीं 55 वर्षीय सुमित्रा देवी। इंदौरा की इस ‘दूसरी पारी’ की शुरुआत के साथ ही पिता-पुत्रों के रिश्तों के समीकरण बदल गए।
बाप-बेटे साढ़ू बन गए हैं। पिता का विवाह बड़े बेटे ने अपनी परित्यकता साली से कराया है। हालांकि इस संबंध के लिए रजामंदी देने में सुमित्रादेवी ने लंबा वक्त लिया। सुमित्रादेवी अब अपनी छोटी बहन की सास भी बन गई हैं।
कैसे जीऊंगा, यह पता है
इंदौरा परिवार की नई मां घर के बड़े बेटे से पांच साल छोटी हैं। रामचरण कहते हैं कि यह फैसला अचरजभरा जरूर है, किंतु हमारे घर की वास्तविकता भी है। खैर, मैं कितना जीऊंगा पता नहीं, लेकिन ये जरूर पता है कि कैसे जीऊंगा। उम्र के इस पड़ाव में पुत्रवधुओं के सहारे जीवनपूर्ण करने के बजाय जीवनसंगिनी के साथ अंतिम समय बिताने के विचार ने मुझे पुनर्विवाह के लिए प्रेरित किया।