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मल्लिका बना सतीश चढ़ा किन्नरों के हत्थे

7 वर्ष पहले
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पारोशर्मा ने बताया कि अम्बाला के असली किन्नरों को पहचान पत्र दिए गए हैं। जिनका काम गा बजाकर पेट पालना है। नकली किन्नर ट्रेनों, बस अड्डों और अन्य जगहों पर लोगों को डरा धमकाकर पैसे ऐंठ लेते हैं। इसके अलावा कई युवक किन्नर का नकली भेष बनाकर देह व्यापार जैसे कामों में भी लगे हुए हैं।

राम बाग रोड पर पकड़े गए नकली किन्नर उसके साथी से धक्कामुक्की करते किन्नर।

भास्कर न्यूज | अम्बाला

गांवकेसरीमें नकली किन्नर बनकर लोगों से माल ऐंठ रहा एक युवक असली किन्नरों के हत्थे चढ़ गया। साथ ही उसे बाइक पर लेकर घूमने वाले एक युवक को भी किन्नर गाड़ी में उठाकर कैंट में महंत पारो शर्मा के डेरे पर ले आए। यहां पर उनकी खातिर करने के बाद उन्हें हाउसिंग बोर्ड पुलिस चौकी लाया गया जहां उनकी खबर ली गई। दोनों युवकों को किन्नरों से माफी मंगवाने के बाद छोड़ दिया गया।

धरागया केसरी गांव से: पारोशर्मा ने बताया कि गांव इशरहेड़ी का रहने वाला सतीश पिछले कई महीनों से उनके इलाके में मल्लिका के नाम से घूम रहा है। वह गांवों और मोहल्लों में जाकर बधाई लेकर उन्हें चूना लगा रहा था। बधाई देने वालों को वह बद्दुआएं देने से भी परहेज नहीं करता। उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। वह गांव केसरी में अपने एक साथी सलीम के साथ उस वक्त पकड़ा गया जब वह एक डाॅक्टर के घर से जबरन बधाई ले रहा था। उसे पकड़कर किन्नर पायल, शालू, प्रीति, आंचल और शिवानी सीधे कैंट के डेरे पर ले आईं। उसे जांचने पर पता चला कि वह लड़का है। चार साल पहले भी सतीश को नकली किन्नर बनकर घूमते हुए लोगों से बधाई लेते हुए पकड़ा था। तब भी वह माफी मांगकर छूट गया था। शनिवार को भी सतीश के बैग से महंगे सूट, अन्य कपड़े खाने-पीने का सामान भी बरामद हुअा है। सतीश के साथ पकड़े गए उसके मोटरसाइकिल ड्राइवर सलीम ने बताया कि उसे सतीश रोजाना पांच सौ रुपए दिहाड़ी देता था। इसके अलावा खाना पीना और पेट्रोल का खर्चा भी मिलता था।