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सुहाग पुत्र की रक्षा के लिए आज से रखें श्री महालक्ष्मी व्रत

7 वर्ष पहले
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घरमेंयदि बार-बार विपदाएं रही हों। पति पुत्र पर आने वाले संकट/ आपदाएं समाप्त नहीं होने का नाम ले रही हैं तो आज इन विपदाओं से निपटने का सबसे सर्वोत्तम अवसर है।

अपने पति बच्चों की सलामती उनकी लंबी आयु के लिए श्री महालक्ष्मी का व्रत जिसे सच्चे मन से रखा जाए तो सब संकट दूर हो जाएंगे। यही कारण है कि इस व्रत को सुहाग की रक्षा करने वाला दूध-पूत की रक्षा करने वाला माना गया है। करवा चौथ गणेश चतुर्थी की तरह से व्रत का भी विशेष महत्व माना गया है।

व्रत के पीछे यह है कथा

ऐसे रखें व्रत

पंडितअशोक शास्त्री ने बताया कि राधा अष्टमी से 15 दिन पहले शुरू होता है। सोमवार को रखे जाने वाले इस व्रत के लिए हल्दी से रंगे कच्चे सूत के 16 गांठों वाले श्री महालक्ष्मी के रक्षा सूत्र (मोली) हाथों पर बांधे। इसके बाद विधि विधान श्रद्धाभाव से शुक्रवार को व्रत के उद्यापन के साथ इन धागों को खोल दें। श्री महालक्ष्मी का व्रत पति-प|ी दोनों द्वारा धन परिवार एवं संतान सुख के लिए किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार एक नगर में एक मंगल सिंह नाम का राजा था। शिकार खेलने के लिए जाते वक्त वह उस सरोवर के निकट चला गया जहां पतिव्रता स्त्रियां स्नान कर रहीं थी और महालक्ष्मी के सूत्रे पूज रही थी। पतिव्रता स्त्रियों ने राजा को इस तरह वहां देख बिना सोचे श्राप दे दिया। राजा ने बताया कि नि:स्वार्थ जल-पान करने यहां गया है। स्त्रियों ने उसे महालक्ष्मी के सूत्रे (मोली) देते हुए कहा कि इसे महारानी को दे दें। वह व्रत रखेगी तो सब ठीक हो जाएगा। राजा ने ऐसा ही किया। महारानी ने अहंकारवश उन्हें कूड़ेदान में फेंक दिया। महालक्ष्मी की अवज्ञा से बावली हो गई, जिस स्थान से गुजरती, वहां आग लग जाती। साथ ही इतनी कुरूप हो गई कि लोग उसे पागल समझ कर उसे पत्थर मारने लगे। एक दिन वह जंगल में एक फकीर की कुटिया के पास पहुंची। फकीर ने रानी को बेटी बनाकर रखा। वहां रहते हुए रानी ने लगातार 12 साल अश्विन, कृष्ण अष्टमी का व्रत रखा। इसी बीच राजा उसी जंगल की ओर शिकार खेलने के लिए गया जहां रानी रह रही थी। राजा ने रानी को पहचान लिया अौर सब पहले जैसा अच्छा हो गया।