पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • मंदी पड़ी चुनाव की \"मंडी\'

मंदी पड़ी चुनाव की \"मंडी\'

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
चुनावीदौरशुरू हो गया है, लेकिन शोरगुल है ही चहल-पहल दिखाई दे रही है। घरों की छत गाड़ियों पर लगने वाले चुनावी झंडे भी नदारद हैं। झंडों के साथ अन्य चुनावी सामग्री के लिए एशिया की विख्यात मंडी के रूप में जाने-जाने वाली अम्बाला की चुनावी मंडी के हालत भी इस समय कुछ ऐसे ही है। झंडों की अभी तक डिमांड बढ़ी है, नेताओं की टोपियों की।

कुछ समय पहले बाजार में छाई अन्ना और फिर \\\"आप\\\' की टोपी भी कार्यकर्ताओं की तरह बाजार से गायब हो गई हैं। ज्यादातर दुकानों पर तो ये टोपियां ही नहीं हैं, हैं ताे उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा है। यही हाल खादी ग्रामोद्योग के भी हैं। बहरहाल कारिगरों पर भी चुनाव की मंदी का असर देखा जा रहा है। इक्का-दुक्का राजनीतिक पार्टियों को छोड़कर शेष के तो चुनाव कार्यालय भी अभी तक नहीं खुल सके हैं। कैंट में भाजपा इनेलो के चुनाव कार्यालय को छोड़कर किसी बड़े दल का चुनावी कार्यालय खुला है किसी छोटे दल का। यही हाल अम्बाला शहर के हैं। विभिन्न पार्टियों द्वारा अपने प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाना बेशक इसके लिए बड़ी वजह हो, लेकिन चुनाव आयोग की हिदायतें इसमें सबसे बड़ी बाधक है। चुनाव खर्च सीमित करने के कारण कोई भी प्रत्याशी खुलकर खर्च नहीं दिखाना चाह रहा है। रिक्शा ऑटो चालकों को भी पार्टी हाइकमान ओर से उस दिन का इंतजार है जब वे उन्हें अपना पार्टी का प्रचार-प्रसार करने के लिए हायर करेंगे। चूंकि अभी तक लाउडस्पीकर के जरिए भी किसी भी प्रत्याशी ने अपना या पार्टी का प्रचार शुरू नहीं किया है। शहर हो या गांव हर जगह ऐसी ही स्थिति है। लिहाजा हर किसी को बस अब यह जानने की उत्सुकता है कि कैंट से किस-किस पार्टी के कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे। साथ ही आजाद उम्मीदवार कौन-कौन से होंगे।