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कूड़े के साथ मेडिकल वेस्ट भी

6 वर्ष पहले
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केस भी संभव : एडवोकेटदेव बत्तरा ने बताया कि कर्मचारियों की मिलीभगत से डस्टबिन गए हैं तो उन पर 406 तथा 409 के तहत केस दर्ज होगा। वहीं स्कूल या अस्पताल पर भी 379 के तहत केस संभव।

^निजी संस्थानों में सरकारी संपत्ति का प्रयोग नहीं किया जा सकता। अगर डस्टबिन वहां रखे गए हैं तो उन्हें वहां से तुरंत उठवाया जाएगा। जिन कर्मचारियों ने वहां डस्टबिन रखे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कमलप्रीतकौर, नगर निगम की ज्वाइंट कमिश्नर।

^हिलिंग टच के संचालक डॉ. कुलदीप ने कहा कि ट्रेड फीस जमा करा रखी है। डस्टबिन पहले अस्पताल के बाहर पड़े थे। वहीं पीकेआर जैन सीसे की प्रिंसिपल ज्योत्सना ने कहा कि स्कूल ने यह डस्टबिन कबाड़ी से खरीदे थे।

केस 2 वहींपीकेआर पब्लिक स्कूल में भी एक नहीं दो डस्टबिन रखे गए हैं। हैरानी तो इस बात की है कि इन पर से नगर निगम पेंट कर गायब कर दिया गया है।

केस 1 सिटीके चंडीगढ़ रोड स्थित हीलिंग टच अस्पताल में पीछे नगर निगम के एक नहीं दो डस्टबिन रखे गए हैं। जिन पर बाकायदा नगर निगम अम्बाला लिखा हुआ है।

^सभी पार्षद बैठक में डस्टबिन वार्डों में देने की बात कर रहे हैं और यहां कर्मचारी निजी संस्थानों के अंदर पहुंचा रहे हैं। जिस कर्मचारी ने ऐसा किया है उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग होगी। हरीशशर्मा, पार्षद।

निगम के डस्टबिन पर प्राइवेट स्कूल और अस्पतालों का कब्जा

उज्ज्वल शर्मा | अम्बाला

इसेनगरनिगम की शिथिलता कहें या निजी संस्थानों की दादागिरी। सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए निगम के डस्टबिन को अपनी जागीर समझ लिया और उन्हें वहां से हटाकर अपने प्रयोग में लाने लगे। भास्कर को इस मामले की जब भनक लगी तो ग्राउंड रियलिटी का पता चला। कई सार्वजनिक स्थानों पर रखे गए डस्टबिन या तो प्राइवेट स्कूलों के अंदर चले गए हैं या फिर प्राइवेट अस्पतालों में प्रयोग किए जा रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि निगम की गाड़ियां स्वयं स्कूल अस्पताल के अंदर जाकर डस्टबिन से कूड़ा एकत्रित कर रहे हैं।

निगम के पास सिटी कैंट में कूड़ा डालने के लिए अभी तक पूरे डस्टबिन नहीं हैं। पार्षद भी बार-बार डस्टबिन देने की मांग करते रहे हैं। अन्य स्थानों पर रखे गए डस्टबिन भर जाते हैं तो उन्हें उठाने के लिए निगम की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचती, लेकिन निजी संस्थानों के अंदर रखे गए डस्टबिन भरते ही गाड़ी लेकर उठा लिया जाता है।

250डस्टबिन हैं सिटी कैंट में: नगरनिगम के पास सिटी कैंट में 250 डस्टबिन हैं। जब यह डस्टबिन भर जाते हैं छह गाड़ियां इन्हें उठाने का काम करती हैं। कूड़ा-कर्कट को उठाकर शहर के बाहर ले जाती हैं। एक डस्टबिन की कीमत 25 हजार है।

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निगम के डस्टबिन में अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट होते हैं जिन्हें गाड़ी सामान्य कूड़े के साथ उठाकर ले जाती है। इससे बीमारियांे का खतरा रहता है। इंजेक्शन दवाइयों के रैपर आसानी से नहीं गलते।