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दूध में सिंथेटिक पदार्थ मिलाकर सेहत से हो रहा खिलवाड़

6 वर्ष पहले
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केवल त्योहारों के दिनों में ही होती है प्रशासनिक कार्रवाई

राममूर्तिघारी | शहजादपुर

गांवोंसेदूध विक्रेता सस्ते भाव से दूध को खरीदकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। क्रीम को दूध में से पहले ही निकाल लिया जाता है। उसके बाद ही वह दुकानों, ढाबों, होटलों घरों तक पहुंचता है और ये गोरखधंधा नारायणगढ़, शहजादपुर, कालाआंब में खुलेआम जारी है। ये मिलावटखोर इतने चालाक हैं कि दूध में मिश्रण इस प्रकार करते हैं कि हर रोज दूध को घर दुकान से लेने वाले उसकी सही तरह से उसकी क्वालिटी गुणवत्ता की पहचान नहीं पाते। नारायणगढ़, शहजादपुर तथा कालाआंब में विभाग के द्वारा नाममात्र ही इस ओर कार्रवाई की जाती है और त्योहारों के दिनों में तो कुछ दिखावा मात्र ही कार्रवाई की जाती है। लेकिन त्योहार जाने के बाद कोई देखने नहीं आता कि हो क्या रहा है।

यह भी बात किसी से छिपी नहीं है कि मिलावटी दूध के कारोबार की हर छोटे-बड़े स्तर पर खुलेआम से चल रहा है। मिलावट खोर दूध में से क्रीम को निकालकर दूध के अंदर सिंथेटिक पदार्थों को उसमें मिला देते हैं। अगर आप इसको गौर से देखेंगे भी तो इसे पहचान नहीं पाएंगे कि कौन सा दूध शुद्ध है और कौन सा मिलावटी। यह धंधा अफसरों की आर्शीवाद के बिना चल नहीं सकता।

पशु पालक दवेन्द्र ने बताया कि दूध के अंदर जहरीली चीजें मिलाई जाती हैं, जैसे कि यूरिया डिटरजेंट पाउडर, रिफाइंड तेल, कास्टिक सोड़ा, सफेद पेंट।

एक दुकानदार ने नाम छापने की शर्त बताया कि एक बाजार में ऐसा पाउडर भी है कि जिससे हर प्रकार की उस मिठाई को बनाया जा सकता है जो दूध से बनती है। सरकार ने मिलावट करने वालों के लिए सजा जुर्माने का प्रावधान तो किया है लेकिन वह काफी नहीं है।

सिटी से होती है कार्रवाई

नारायणगढ़के एसएमओ राम प्रकाश शहजादपुर के एसएमओ तरुण प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसकी जांच अम्बाला शहर के फूड सेफ्टी आॅफिसर के अंतर्गत आता है और जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से बात करनी चाहिए तो उनके मोबाइल पर संपर्क नहीं हो पाया।

इन बीमारियों का खतरा

जहरीलेदूध से बनी मिठाइयां मिलावटी दूध को पीने से कई तरह की गंभीर बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। कैंसर, किडनी में प्रॉब्लम, पेट की बीमारी अन्य कई गंभीर बीमारियों लोगों को जकड़ रही हैं। आमजन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को समय समय पर इनके खिलाफ चेंकिंग करनी चाहिए। वही दूसरी ओर अधिकारी त्योहारों के दिनों में एक या दो बार ही मुश्किल से चेकिंग करने के लिए आते हैं। उसके बाद दोबारा सारे साल दिखाई तक नहीं देते।