पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • दो दिन की मोहलत थी, दस माह में भी निर्माण नहीं हटवा पाया निगम

दो दिन की मोहलत थी, दस माह में भी निर्माण नहीं हटवा पाया निगम

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वार्डनंबर16 के अधीन आने वाले गांव मछाेंडा में नंबर की जमीन पर बने विवादित निर्माण को लेकर विवाद एकबार फिर गरमा गया है। फरियादी अमरीक सिंह, साहब सिंह, गुलजार सिंह, अजैब सिंह, गुरचरन कौर, मंजीत सिंह और गेजे को नगर निगम के अधिकारी फुटबाल की तरह यहां से वहां भगा रहे हैं। कार्रवाई के दस महीनों बाद भी फरियादियों को इंसाफ नहीं मिला है। कैबिनेट मंत्री अनिल विज के दरबार में मामला पहुंच गया है।

झांकनेतक नहीं आया कोई निगम कर्मी: साहबसिंह के बेटे गुरजीत सिंह ने कहा कि शुरू से नगर निगम की इस जमीन पर कार्रवाई की नीयत ही नहीं थी, इसके बाद कष्ट निवारण समिति में शिकायत दी गई जिसके बाद नगर निगम कर्मियों को पूर्व मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा ने फटकार भी लगाई थी। फटकार के बाद पिछले साल 30 अप्रैल को गांव मच्छौंडा की 5 कनाल 1 मरले के नंबर के गोहर से कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई थी। अमरीक सिंह ने जेसीबी को गाइड करते हुए कार्रवाई करवाई थी। कार्रवाई के दौरान एक परिवार ने सामान निकालने के लिए और विवादित निर्माण को गिराने के लिए दो दिनो की मोहलत मांगी थी। परंतु लगभग दस महीने बीत जाने के बाद भी तो विवादित निर्माण गिराया गया और ही नगर निगम की ओर से कोई कार्यवाही की गई है। शिकायत का निवारण करना तो दूर कोई कर्मचारी यहां झांकने तक नहीं आया।

^मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। यदि किसी निगम अधिकारी ऐसी कोताही बरती है, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मैं निगम अधिकारियों से मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह पाऊंगी। कमलप्रीतकाैर, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम।

प्रशासन काे खींचेंगे काेर्ट में

गुरजीतसिंह ने बताया कि उन्होंने डीसी से लेकर नगर निगम के हर छोटे बड़े अधिकारी से निर्माण गिरवाने की गुहार लगाई है। प्रशासन तो इंसाफ दिलवाने में नाकाम दिखाई दे रहा है इसलिए अब कोर्ट जाकर ही इनसे कार्यवाही करने का कारण पूछ लिया जाए। लोगों को इंसाफ के लिए यहां वहां भटकना पड़ रहा है। गुरजीत ने कहा कि अधिकारियों को अब संज्ञान लेना ही होगा। गुरजीत सिंह ने बताया कि जब भी वह अपनी शिकायत का स्टेटस जानने के लिए नगर निगम में जाते हैं तो कभी स्टाफ होने की बात कही जाती है तो कभी संबंधित अधिकारी ही नहीं होता। नगर निगम के अधिकार कई बार फटकार लगाकर भगा भी देते हैं।