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  • जब तक लक्षण दिखाई देते हैं तब तक 85 प्रतिशत तक खराब हो चुकी होती हैं किडनियां : डॉ रंजन

जब तक लक्षण दिखाई देते हैं तब तक 85 प्रतिशत तक खराब हो चुकी होती हैं किडनियां : डॉ रंजन

6 वर्ष पहले
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एकवक्तथा जब किडनी दान करने वाले और मरीज के ब्लड ग्रुप एक से होने पर ट्रांसप्लांट हो नहीं पाता था। पर अब लेटेस्ट और एडवांस्ड तकनीक की बदौलत यह बदल चुका है। मोहाली का फोर्टिस हॉस्पिटल सफलतापूर्वक एबीओ इंकंपैटिबल ट्रांसप्लांट करता रहा है, जिससे कई मरीजों को नई जिंदगी मिल रही है। एबीओ तकनीक के बारे में अस्पताल के डाॅक्टरों ने मीडियाकर्मियों को जानकारी दी।

टीम में डॉ. (कर्नल) एच.जे.एस. गिल (सीनियर कंसल्टेंट - नेफ्रोलॉजी), डॉ. प्रियदर्शी रंजन (किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन) और डॉ. अमित शर्मा (कंसल्टेंट - नेफ्रोलॉजी) शामिल थे। साथ ही हेमाफेरेसिस एक्सपर्ट और ब्लड बैंक की हेड डॉ. अपरा कालड़ा भी थीं। डॉ. रंजन ने कहा, ‘पारंपरिक इलाज में ट्रांसप्लांट के लिए एक जैसे ब्लड ग्रुप की जरूरत पड़ती थी ताकि किडनी के काम करने का चांस बना रहे। हालांकि अब ऐसा कोई जरूरी नहीं कि डोनर और मरीज का ब्लड ग्रुप ट्रांसप्लांट के लिए एक जैसा हो। आजकल एबीओ इंकंपैटिबल ब्लड टाइप किडनी ट्रांसप्लांट एक सच्चाई है और फोर्टिस मोहाली में इस तरह के ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं जिसका सबूत अम्बाला की सरोज सैनी का केस भी है। फोर्टिस मोहाली में ऐसे 12 से ज्यादा मरीजों का ट्रांसप्लांट हुआ है जिनमें से तीन हिमाचल प्रदेश से हैं।’ डा. रंजन ने कहा कि दुनिया भर में उन मरीजों की गिनती लगातार बढ़ रही है जिनकी किडनी काम करना बंद कर देती है। ऐसे में किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है। इस तकनीक से अनगिनत जिंदगियां बचाना मुमकिन है।

पत्रकारों से बातचीत करते फोर्टिस अस्पताल के डाॅक्टर।