58 सीटों पर कभी नहीं खिला कमल
हरियाणा में भाजपा को कभी एक बार में 16 से ज्यादा सीटें नहीं मिली। इस बार पार्टी 46 प्लस का मिशन लेकर चल रही है। लक्ष्य हासिल करने के लिए बेशक भाजपा ने विपक्षी दलों के कई दिग्गज नेताओं को जोड़कर अपना कुनबा बढ़ा लिया है, मगर हरियाणा की 58 ऐसी सीटें है, जहां 1967 से आज तक कमल नहीं खिला। 25 सीटों पर तो कमल की ड्योढ़ी तक नहीं फूटी।
1966 में प्रदेश गठन के बाद जनसंघ से भाजपा (1980 में) के सफर पर नजर दौड़ाएं तो 32 सीटों पर कभी कभी भाजपा को जीत मिली है। अब देखना यह है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी की सत्ता और छवि का प्रदेश में भाजपा को कितना फायदा मिलता है।
परिसीमन में ये सीटें खत्म हो गईं छछरौली,मेवला महाराजपुर, तावडू, हसनगढ़।
नारनौंद
नारनौल
महेंद्रगढ़
िभवानी
रोहतक
कलानौर
फतेहाबाद
सिरसा
तिगांव
फरीदाबाद
बल्लभगढ़
फरीदाबाद एनआईटी
गुड़गांव
सोनीपत
पानीपत
समालखा
असंध
घरौंडा
करनाल
नीलोखेड़ी
रादौर
यमुनानगर
जगाधरी
साढ़ौरा
मुलाना
शाहबाद
अम्बाला कैंट
अम्बाला िसटी
{1987 से भाजपा को मिली थी सर्वाधिक 16 सीटें
{1991 में भाजपा ने अपने दम पर 89 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 2 जीतीं।
{2005 में 2 और 2009 के चुनाव में 4 सीटों पर जीती।
{2014 में पहली बार 7 लोकसभा सीटें जीती प्रदेश में।
नोट : हरियाणा गठन से लेकर अब तक इन सीटों पर जनसंघ और भाजपा जीती है।
57 सीटोंपर 10 हजार से कम वोट
46सीटों5 हजार से कम।
25सीटोंपर 2 हजार से कम।
9सीटोंपर 1 हजार से कम।
10सीटोंपर 1% भी वोट नहीं।
560वोटभी िमले होडल में।