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- टिकट दावेदारों में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होने की होड़
टिकट दावेदारों में धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होने की होड़
विधानसभाचुनावका बिगुल बज चुका है। वोट के पाने के लिए नेता अब कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। लेकिन चुनाव आयोग की हिदायतें कई जगह उनकी राह का रोड़ा बन रही हैं। ऐसे में इनसे बचने की जुगत भी इन नेताओं ने निकाल ली है।
अम्बाला सहित अन्य जिलों में अभी तक कांग्रेस बीजेपी बसपा सहित अन्य पार्टियों ने अपने पूरे उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे हैं। इसी का फायदा उठाते हुए अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए आजकल पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने धार्मिक सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत बढ़ा दी है। चाहे छोटा कार्यक्रम क्यों हो, राजनेता कोई भी मौका हाथ से नहीं गंवाना चाहते।
आखिर ऐसा हो भी क्यों न, चुनाव के महज 27 दिन ही शेष हैं। टिकट मिल गई तो किसी भी सामाजिक धार्मिक कार्यक्रम में बतौर पार्टी नेता शामिल नहीं हो सकते। स्टेज पर कोई भाषण भी नहीं दे सकते। ऐसे में टिकट मिलने से पहले इन नेताओं में धार्मिक सामाजिक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बनने की होड़ सी लग गई है।
लोगों में बढ़ा नेताओं को बुलाने का चलन
जनताभी ऐसे ही दावेदारों को कार्यक्रम में बुलाना चाहती है जो उनके लिए घोषणा करने के साथ चंदे की मोटी राशि भी देकर जाए। चुनाव के साथ त्योहारी सीजन भी सिर पर है। 25 से नवरात्रों की शुरुआत है। अम्बाला में तो करीब आधा दर्जन स्थानों पर भागवत कथा की शुरुआत भी हो चुकी है। रक्तदान शिविर लगाए जा रहे हैं। साथ ही रामलीला भी सप्ताह भर में शुरू हो जाएंगी। ऐसे में इन सभी लोगों को उम्मीद है कि नेता को बुलाया जाए तो कुछ हो हो, अब मोटा चंदा आना तो तय है। इसीलिए धनवान नेता की पूछ सबसे पहले हो रही है। खुद नेता अपने खासमखास नुमाइंदों को भेजकर बतौर मुख्य अतिथि बुलाने की गुहार कार्यक्रम आयोजकों से लगा रहे हैं। इस बहाने प्रचार प्रसार तो होगा ही, साथ ही अपने धार्मिक सामाजिक प्रवृति के होने का प्रमाण भी जनता को दे दिया जाएगा।