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दलों के खेल बिगाड़ू नेता, बागी होकर कभी खुद जीत जाते हैं तो कभी दुश्मन को जिता देते हैं

7 वर्ष पहले
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बगावत और जीतने के बाद दलबदल की राजनीति शुरुआत से आज तक अपना असर दिखाती रही है। ऐसा कोई दल नहीं, जो इससे अछूता रहा हो। टिकट के लिए जितनी ज्यादा दावेदारी, बगावत के सुर उतने ही तेज। बागी होकर आजाद या दूसरी पार्टी से लड़ने वाले ये खेल बिगाड़ू नेता कई बार तो खुद जीत जाते हैं तो कई बार अपनी पुरानी पार्टी को हराने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रदेशभर में बगावत का बिगुल बजा है। पिछले वर्षों में बागियों ने कैसे गेम बिगाड़ी, इस पर रिपोर्ट...

तेजेंद्रपाल

2005 मेंपाई से तेजेंद्रपाल मान का टिकट कट गया। सज्जन सिंह ढुल कांग्रेस का टिकट लेकर आए। मान ने बागी होकर चुनाव लड़ा और जीत गए। मान को ३२४३५ वोट मिले। सज्जन सिंह को २५७४९ वोट मिले। मान ने कांग्रेस प्रत्याशी सज्जन सिंह को ६६८६ वोटों से पराजित किया। वहीं पुंडरी से कांग्रेस से अलग होकर दिनेश कौशिक ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्हें ३३०३४, कांग्रेस प्रत्याशी भाग सिंह आर्य को १९०७६ वोट मिले।

अशोक अरोड़ा

कुलवंत

गोपाल कांडा

फूलचंद

भाजपा ने समर्थन वापस लिया, बंसीलाल सरकार गिरी

3 एमएलए नाराज हुए, ओपी चौटाला की सरकार गिरी

41 एमएलए तोड़ देवीलाल से भजन सीएम बने

6 एमएलए तोड़ 53 एमएलए के साथ भजन फिर सीएम बने

1999

1990

1979

1982

2005 मेंकांग्रेस के बागी ज्ञानचंद ने पार्टी प्रत्याशी फूलचंद मुलाना का खेल बिगाड़ दिया था। टिकट मिलने से नाराज हुए ज्ञानचंद चुनाव में अपने साथ मुलाना को भी हरा दिया था। इस चुनाव में मुलाना इनेलो के राजबीर सिंह से 2837 मतों से चुनाव हार गए थे। ज्ञानचंद को बेशक 734 वोट मिले थे, लेकिन उन्होंने अंदर खाते मुलाना की पूरी तरह से काट की थी।

2009 केचुनाव में थानेसर सीट पर कांग्रेस ने रमेश गुप्ता को इनेलो के अशोक अरोड़ा के सामने उतारा। नाराज कांग्रेसी सुभाष सुधा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। सुधा 17025 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस का गेम बिगड़ गया। गुप्ता 21231 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे और अरोड़ा 29516 वोट लेकर जीत गए। वहीं, लाडवा में भी कांग्रेस के बागी पवन गर्ग के कारण इनेलो के शेरसिंह बड़शामी चुनाव जीत गए।

2009 मेंगुहला विधानसभा क्षेत्र में २००९ में दिल्लूराम राम बाजीगर कुलवंत बाजीगर कांग्रेस से टिकट के दावेदार थे। टिकट दिल्लूराम बाजीगर को मिला। कुलवंत बाजीगर ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा। दिल्लूराम