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लंच की राजनीति और मतभेद

6 वर्ष पहले
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लंच की राजनीति और मतभेद

लंचकी बात से एक और किस्सा याद आया। अपने खट्टर काका और दाढ़ी वाले बाबा अनिल विज के “ग्रह” काफी दिनों से मेल नहीं खा रहे हैं। भले ही दोनों एक सरकार का हिस्सा हैं, लेकिन दूरियां बढ़ती जा रही हैं। इस दूरी को कम करने के लिए अपने खट्टर काका ने सूरजकुंड में सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों का लंच रख दिया। लेकिन विज उनसे भी एक कदम आगे निकले और उन्होंने उसी दिन अपने शहर अंबाला में जनता दरबार लगा लिया। सत्ता के करीबियों की सलाह है कि लंच खिलाने के बजाय खट्टर काका को अंबाला में जाकर ग्रह शांत करवाने चाहिए।