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- वहां एक चाय वाला पीएम बन गया, यहां विधायक का परिवार चाय बनाता रह गया
वहां एक चाय वाला पीएम बन गया, यहां विधायक का परिवार चाय बनाता रह गया
नरेंद्रमोदी प्रधानमंत्री बने तो चर्चा रही कि एक चाय वाला पीएम बन गया। यह देश-दुनिया में कौतूहल का विषय रहा। ऐसी ही कहानी 37 साल पहले 70 के दशक में अम्बाला के मास्टर शिव प्रसाद की भी है। तीन बार विधायक बने शिव प्रसाद ने अपने सिद्धांतों पर कायम रहकर शहर को खास मुकाम दिलाया।
एक बार तो मास्टरजी को दल बदलने के लिए एक पूर्व मुख्यमंत्री ने प्लाट और फ्लैट देने का लालच भी दिया गया, लेकिन वे नहीं डिगे। वे विधायकी के साथ चाय भी बेचते रहे। अब उनके बेटे अिनल पिता की दुकान चला रहे हैं और इसी काम से संतुष्ट हैं।
शिव प्रसाद आरएसएस के कार्यकर्ता थे। 54 वर्ष की आयु में 1977 में पहली बार जनता पार्टी से विधायक बने। िफर 1982 1987 में बीजेपी से हरियाणा विधानसभा में पहुंचे। वे 1991 तक अम्बाला सिटी से विधायक रहे।
मास्टरजी ने आर्य स्कूल में 40 रुपए मासिक तनख्वाह पर पढ़ाना शुरू किया था। िफर रेलवे स्टेशन के सामने चाय की दुकान भी खोली। सुबह दो घंटे तक चाय बेचते, िफर स्कूल जाते। शाम को भी दुकान पर रहते। एक जनवरी 1988 को दुकान पर बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। लेकिन जान बच गई। मई 2007 में उनका देहांत हो गया।
अम्बाला निवासियों को पानी के संकट से मास्टर जी ने ही उबारा। अपना अस्पताल, सामान्य अस्पताल, अग्रसेन चौक रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण उनके प्रयासों से ही हुआ। 27 वर्षों बाद वर्तमान में पास होने वाले रिंग रोड का प्रपोजल भी उन्होंने ही सरकार के समक्ष रखा था। सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कों का निर्माण कराकर उन्हें मुख्य मार्गों से जुड़वाने का काम किया।
पूर्व िवधायक स्व. मास्टर शिव प्रसाद
मास्टर शिव प्रसाद के 56 वर्षीय बेटे अनिल कुमार विरासत के रूप में चाय एवं हलवाई की दुकान ही मिली है। अनिल के बड़े भाई सुरेंद्र की मौत हो चुकी है। वे रोडवेज में नौकरी करते थे। पिता की मौत के बाद भी अिनल भाजपा से ही जुड़े रहे। पिछले वर्ष ही उन्होंने भाजपा जिला महासचिव का पद छोड़ा है। अनिल कहते हैं िक दुकान का काम संभालने में ही पूरा दिन गुजर जाता है। पार्टी को समय नहीं दे पाए तो क्या फायदा। पिताजी के आदर्शों को जीवन में अपनाया है। कोशिश यही रहेगी कि शहर के लिए कुछ अच्छा करें। मास्टर जी के दो भाई सोहनलाल और लक्ष्मी चंद भी शहर में हलवाई की दुकान चलाते थे। उनके बाद अब बच्चे काम को संभाल रहे हैं। मास्टर ज