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गर्भवती नाबालिग की चचेरी बहन से भी हुआ था दुष्कर्म

7 वर्ष पहले
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कोर्टसे गर्भपात की इजाजत मांगने वाली नाबालिग लड़की के बयान से मामले में नया मोड़ गया। पीड़िता ने बुधवार को कोर्ट में दिए बयान में कहा कि आरोपियों ने उसकी नाबालिग चचेरी बहन को भी अगवा कर दुष्कर्म किया था। जज बिमलेश तंवर गर्भपात की इजाजत मांगने के मामले में 19 सितंबर को फैसला सुनाएंगी।

वकील नरेंद्र शर्मा ने बताया कि पीड़िता ने बयान में कहा कि 5 अप्रैल को उसके पड़ोस में रहने वाली आशा रानी ने मेवाराम के साथ मिलकर उसे और उसकी बहन को सुरजीत सुखदेव के साथ भगाया। आरोपियों ने धमकी दी थी कि अगर घर जाने की बात कही तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। आशा रानी (सुरजीत की मौसी) मेवाराम ने उसे तथा उसकी बहन को सुरजीत सुखदेव के साथ ट्रेन में बिठाया। वे उन्हें कुरुक्षेत्र तथा बाद में हिमाचल के ऊना ले गए। इसके बाद सरकाघाट ले जाकर तीन-चार दिन होटल में रखा। 15 अप्रैल को वे मोहाली के गुरुद्वारा में आनंद कारज (शादी) किया। 22 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से प्रोटेक्शन ली। 23 अप्रैल को उन्हें प्रोटेक्शन मिली। 24 अप्रैल को नाबालिग लड़की को सुरजीत करनाल स्थित गांव मथाना में अपने घर ले गया, जबकि उसकी चचेरी बहन को सुखदेव बड़ावला गांव ले गया। वहां सुखदेव ने उसकी बहन के साथ दुष्कर्म किया। नाबालिग ने बताया कि सुरजीत तब से लेकर 17 जुलाई तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इसी कारण वह गर्भवती हो गई। वकील ने बताया कि नाबालिग की चचेरी बहन का मामला भी साहा थाने में दर्ज है।

हाईकोर्ट ने रद्द की आरोपी की याचिका

नाबालिग को गर्भपात कराने देने की मांग संबंधी सुरजीत की याचिका बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज अमोल रतन सिंह ने खारिज कर दी। इससे पहले मंगलवार रात 11 बजे हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त वारंट अफसर साहा थाना प्रभारी के साथ लड़की के गांव पहुंचे। नाबालिग को हिरासत में लेकर वे उसे थाने ले गए और पूछताछ की। नाबालिग ने कहा कि वह अपने मां बाप के साथ सुखी है। उसे उनसे किसी प्रकार का डर नहीं है। इसके बाद वारंट अफसर ने नाबालिग को हाईकोर्ट में पेश होने के लिए कहा था। पीड़िता के वकील नरेंद्र शर्मा ने बताया कि इस समय नाबालिग साढ़े तीन माह की गर्भवती है। कानून के अनुसार साढ़े चार माह के बाद गर्भपात नहीं कराया जा सकता। इसलिए कोर्ट याचिका पर जल्द फैसला सुनाएगा।