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प्रभु की लीला को कोई सिद्ध योगी ही जान सकता है : वेदांत सिद्धांती

7 वर्ष पहले
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बीपीएस प्लेनेटोरियम में चल रही भगवद कथा में उपस्थित श्रद्धालु।

अम्बाला|बीपीएस प्लेनेटोरियममें चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन वेदान्त सिद्धांती ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि धोबी के कहने पर श्री राम ने सीता का त्याग कर दिया। भगवान की रचाई गई लीला निराली होती है। प्रभु की लीला को कोई सिद्ध योगी ही जान सकता है। उन्होंने बताया कि सीता का त्याग करने का अर्थ वास्तव में सीता का विरह भाव का आस्वादन करना था। विरह भाव ऊपर से दुखदायी, भीतर से प्रेम सुख की प्राप्ति कराता है। दूसरी ओर कृष्ण की जन्म कथा का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद् भगवद के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म गोकुल में यशोदा के गर्भ मेंें हुआ था, लेकिन मथुरा में कंस के कारागृह में श्री कृष्ण सोलह वर्ष के बालक के रूप में प्रकट हुए थे।