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भगवान को पाना है तो बनना पड़ेगा भक्त ध्रुव : पंडित विकास शास्त्री

7 वर्ष पहले
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महेश नगर के समाज सुधर धर्मशाला में चल रही भगवद कथा में उपस्थित श्रद्धालु।

अम्बाला|महेश नगरमें समाज सुधार धर्मशाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालु कृष्ण रंग पूरी तरह से रंग गए। गुरुवार को पंडित विकास चंद्र शास्त्री ने बताया कि मनुष्य के जीवन का सही अर्थ ईश्वर की प्राप्ति है। कुम्हार एक ही मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाता है जबकि कुम्हार वही है और मिट्टी भी एक ही है। इसी प्रकार ईश्वर एक है और हम सब उनके अंश हैं। भक्त ध्रुव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब वे पांच वर्ष की आयु में भगवान को पा सकते हैं तो हम क्यों भक्त ध्रुव नहीं बन सकते। भगवान को पाने की चार सीढ़ियां हैं संस्कार, विश्वास, प्रेम और संबंध। कथा में अोम प्रकाश, मोहिंद्र सेठी, पंडित विपिन, रोहित उषा ने विशेष योगदान दिया।