- Hindi News
- नागा बाबा पीर की दरगाह पर हाई सिक्योरिटी और कैमरों की निगरानी में मांगी लोगों ने मन्नतें
नागा बाबा पीर की दरगाह पर हाई सिक्योरिटी और कैमरों की निगरानी में मांगी लोगों ने मन्नतें
कैंटकेएयरफोर्स स्टेशन क्षेत्र में स्थित नागा बाबा पीर की दरगाह पर श्रद्धालुओं की रविवार सुबह तीन बजे से ही लाइनें लगनी शुरू हो गई थी। पीर बाबा के दर्शन करने के लिए 14 घंटे में हजारों की तादाद में कई राज्यों से पहुंचे लोगों ने यहां शीश नवाया और मन्नतें मांगी।
हाई सिक्योरिटी क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में एक हजार से भी अधिक जवानों की ड्यूटी लगाई गई थी। इस दौरान कोई भी श्रद्धालु किसी भी प्रकार का कोई इलेक्ट्रॉनिक का सामान अंदर नहीं लेकर जा सकता था। प्रत्येक व्यक्ति की गेट से एंट्री तक दो से तीन बार चेकिंग की जा रही थी।
धूलकोट गांव के नजदीक एयरफोर्स स्टेशन क्षेत्र में गांव की सड़क से महज 600 मीटर की दूरी पर दो रनवे हाइवों के बीच नागा बाबा की दरगाह बनी है। सुबह पांच बजे एयरफोर्स गेट को जनता की एंट्री के लिए खोला गया और शाम पांच बजे के बाद दरगाह का कपाट जनता के लिए बंद कर दिए गए। नागा बाबा की दरगाह तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को मेन गेट से दरगाह की एंट्री तक कई बार सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। आने-जाने के दोनों रास्तों पर सिविल ड्रेस में इंटेलीजेंस ब्यूरो, एयरफोर्स जवान और पुलिस जवान मौके पर तैनात रहे। इसके अलावा सेना के कुछ जवान डॉग स्कवायड के साथ मुस्तैद रहे। जबकि एयरफोर्स के दो जवान हाथों में कैमरा लिए आने-जाने वाले लोगों की मूवी बना रहे थे और फोटो खींच रहे थे। दरगाह पर शीश नवाने के लिए लोगों को काफी धक्का-मुक्की कर माथा टेकना पड़ा। इस दौरान वहां सेंट्रल जेल एसपी रतन सिंह, एसीपी सुरेंद्र कौर, एसीपी सुभाष चंद, इंस्पेक्टर राजपाल, इंस्पेक्टर रजनीश और इंस्पेक्टर राजीव मिगलानी समेत कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
मोबाइलजमा करने के लिए लगाया गया चार्ज : एयरफोर्सस्टेशन में बने नागा बाबा की दरगाह पर जाने के लिए किसी भी व्यक्ति को मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में जो लोग मोबाइल लेकर आए हुए थे उन्होंने अपने मोबाइल 10-10 रुपए देकर दुकानों पर रखे।
नागा बाबा पीर की मान्यता
करीब80 वर्ष पहले कोई साधु अपने एक कुत्ते के साथ गांव में आकर बैठ गए थे। लोग उन्हें पत्थर मारने लगे। इससे साधु वहीं समाधि लगाकर बैठ गए जिसके बाद पूरे गांव में बारिश के साथ-साथ तेज तूफान के कारण कहर सा छा गया। इसके बाद ग्रामीणों ने इकट्ठे होकर साधु से माफी मांगी। इसके बाद बाबा ने गांव में बने एक सूखे कुएं को पानी से भरकर चमत्कार कर दिया। बाद में बाबा और कुत्ते ने एयरफोर्स स्टेशन क्षेत्र में उसी स्थान पर अपना शरीर त्याग दिया। उनकी याद में एयरफोर्स स्टेशन में बने दरगाह को साल में केवल एक ही बार खोला जाता है। लोगों की मन्नतें पूरी करने वाले नागा बाबा एयरफोर्स के भी रक्षक माने जाते हैं। एयरफोर्स पुलिस के अधिकारी की मानें तो वर्ष 1965 के युद्ध में पाकिस्तान ने अम्बाला की हवाई पट्टी को अपने बमों का निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एक भी बम हवाई पट्टी पर नहीं गिर सका। तब से आम जनता के साथ-साथ एयरफोर्स अधिकारियों की नागा बाबा के लिए मान्यता बढ़ती चली गई।
कैंट में एयरफोर्स स्टेशन स्थित नागा बाबा पीर की दरगाह के दर्शन को उमड़ी भीड़।