पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सच्चा गुरु मंजिल देता है : सागर

सच्चा गुरु मंजिल देता है : सागर

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी

स्कूलीशिक्षाजिस प्रकार अध्यापक के बिना अधूरी है, उसी प्रकार आध्यापिक शिक्षा भी सद्गुरु के बिना नहीं मिलती। यह उद्गार संत निरंकारी मंडल दिल्ली के मेंबर इंचार्ज प्रेस एंड पब्लिसिटी श्रीकृपा सागर ने रविवार को निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग के दौरान कहे।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किताबें पढ़कर हम स्वयं ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते और हमें उस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए शिक्षक की आवश्यकता होती है उसी प्रकार आत्मा का परमात्मा से बोध करवाने के लिए भी सद्गुरु के सानिध्य में जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु की पहचान यही पहचान है कि वह हमें मंजिल देता है, कि रास्ता। वो हमें निराकार के साथ जोड़ता है और साकार रूप में अपने संतों के साथ जोड़ता है। सदगुरु अपने आपको को सदैव दास कहता है और अपनी सारी खूबियों का ताज अपनी साध संगत को पहनाता है। वो कभी भी अपने साथ नहीं जोड़ता है, जब भी जोड़ता है ब्रह्मज्ञानियों के साथ जोड़ता है। सच्चे गुरु की यही पहचान है कि वह अपने भक्तो को सदैव ऊंचा दर्जा प्रदान करता है।

उन्होंने आगे कहा कि निरंकार के साथ हमारा रिश्ता भक्ति का है। इसी को अंग संग देखकर आगे बढ़ना है। सदगुरु से हमारा रिश्ता ज्ञान का है, वहीं साध संगत से हमारा रिश्ता प्रेम का है। इसलिए यह कहा जाता है कि साध संगत मां का रूप है, जहां सारे बच्चे एक ही वृृक्ष की शाखाओ के सामान है। इसीलिए भक्त एक दूसरे का आदर सम्मान करते हैं। इससे पूर्व स्थानीय मुखी ज्ञान सिंह जी ने आई हुई साध संगत श्री कृपा सागर जी का धन्यवाद किया।

सिटी के निरंकारी सत्संग भवन में मौजूद भक्तों को प्रवचन देते श्री कृपा सागर।