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सिविल अस्पताल में तीन साल से नहीं है पार्किंग की व्यवस्था
भास्कर न्यूज | अम्बाला सिटी
सिटीकेसिविल अस्पताल में वाहन पार्किंग की व्यवस्था होने से एक ओर जहां मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उनके साथ आए मरीजों को अपनी वाहनों के चोरी होने का खतरा भी बना रहता है। मरीज अन्य लोग अपने वाहन को इधर-उधर खड़ा कर देते हैं।
इससे एमरजेंसी केसों के साथ अन्य मरीजों को अस्पताल में लाना ले-जाना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल परिसर में जाम जैसी स्थिति बनी रहती हैं। ऐसा भी नहीं है जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। वे मरीजों उनके साथ अाने वाले लोगों की इस समस्या से भली-भांति परिचित हैं। लेकिन फिर अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा अस्पताल में आने वाले मरीजों उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
निजीएम्बुलेंस से भरा रहता है अस्पताल परिसर : अस्पतालपरिसर में जहां मरीजों के साथ आने वाले परिजन अपने वाहनों को इधर-उधर खड़ा करते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों संस्थाओं की एम्बुलेंस हर समय अस्पताल में मौजूद रहती, जबकि सरकारी एम्बुलेंस अलग से अस्पताल में यहां-वहां खड़ी रहती है।
^करीब तीन साल पहले अस्पताल में पार्किंग का ठेका दिया था, उस समय जो ठेकेदार था, वह अस्पताल में आने वाले मरीजों की बजाए स्कूल, काॅलेज आईटीआई सहित राहगीरों के वाहनों को खड़ा कराता था और उनसे मन चाहा किराया वसूलता था। इसके चलते मरीजों के परिजनों को अपना वाहन खड़ा करने का स्थान ही उपलब्ध नहीं होता। यही कारण है कि अभी तक पार्किंग का ठेका नहीं दिया गया है। अभी ठेके देने की बात चल रही है। अस्पताल में जल्द ही लोगों काे यह सुविधा दी जाएगी। डाॅ.कांता गोयल, पीएमओ, अम्बाला सिटी
5 हजार वाहनों हर रोज हाेती है आवाजाही
शहरके सिविल अस्पताल में हर रोज करीब 5 हजार वाहन आते-जाते हैं, जिसमें बाइक, साइकिल, कार निजी एम्बुलेंस शामिल हैं। कई बार तो वाहनों के इधर-उधर खड़े होने से एमरजेंसी केस भी सही समय पर अस्पताल में नहीं पहुंच पाते। जिसके चलते मरीजों के साथ-साथ अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को परेशानी झेलनी पड़ती है।
तीनसाल से नहीं दिया ठेका
अस्पतालमें पिछले तीन सालों से पार्किंग को ठेका नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं, अस्पताल में बने शेडों के नीचे अपना वाहन खड़ा करने से भी गुरेज नहीं करते है। यहां तक कि डाक्टर भी अपने साथ लेकर आने वाले वाहनों को अस्पताल के गेटों के सामने खड़ा करते नहीं चूकते।