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विकास का मुद्दा नहीं, बिना एजेंडे के होगी निगम बैठक

6 वर्ष पहले
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शायदइसबार नगर निगम के पास शहर के विकास के लिए कोई मुद्दा नहीं है। यही वजह है कि इस बार निगम की जो बैठक होने वाली है, वह बिना एजेंडे के होगी। इसके लिए सभी पार्षदों को सूचित कर दिया गया है। 18 फरवरी को पंचायत भवन में होने वाली बैठक के लिए पार्षदों को सिर्फ पिछली बैठक की कार्रवाई भेजी गई है। जो कार्रवाई लिखी गई है, उसमें भी पार्षदों की पूरी बात नहीं है।

जब भी नगर निगम की बैठक होती है, उससे पहले एजेंडा तैयार होता है। इसके लिए पार्षदों से राय मांगी जाती है कि उन्हें अपने-अपने वार्ड में क्या कुछ करना है या फिर शहर के विकास के लिए उनकी क्या मांग है। बाकायदा लिखित में पार्षद अपनी-अपनी बात एजेंडे में शामिल कराते हैं। जब निगम की बैठक होती है तो उस दिन हर मुद्दे पर चर्चा होती है। जो एजेंडा आम होता है, उसे पास कर दिया जाता है। नहीं तो कैंसिल या पेंडिंग रख दिया जाता है।

एजेंडाजाता कमिश्नर के पास: जबभी निगम का एजेंडा तैयार होता है, उसे कमिश्नर के पास भेजा जाता है ताकि वह शहर के विकास के लिए रखे गए मुद्दों को देख सकें। जब कमिश्नर एजेंडे से संतुष्ट हो जाते हैं तो एजेंडा ज्वाइंट कमिश्नर की मंजूरी से पार्षदों को वितरित कर दिया जाता है। ताकि अन्य पार्षद भी शहर के विकास के मुद्दों पर तैयारी कर सकें।

पिछले दस मुद्दे भी हैं पेंडिंग

पिछलीबैठक में जो 43 मुद्दे रखे गए थे। उनमें से 33 मुद्दों पर ही निगम की बैठक में चर्चा के दौरान नतीजा निकला था। उनमें से भी कुछ मुद्दे पेंडिंग रख दिए गए थे। लंबी चली बैठक के दौरान कमिश्नर मनदीप सिंह बराड़ को जरूरी काम से जाना पड़ा था। उनके जाने के बाद 10 मुद्दे पेंडिंग रख दिए गए थे, जिन पर इस बैठक में चर्चा होगी।

^एजेंडे को एक-दो दिन में तैयार करा लिया जाएगा। एजेंडे की काॅपियां पार्षदों को भिजवाई जाएंगी ताकि शहर का विकास हो सके। कमलप्रीतकौर, ज्वाइंट कमिश्नर, नगर निगम, अम्बाला।

मेयर को चाहिए था कि वह एजेंडा तैयार कराते। तब निगम की बैठक रखते। शायद मेयर को अपने शहर के विकास की चिंता नहीं है। इसलिए बिना एजेंडे की बैठक बुलाई गई है।

एजेंडा तैयार होना चाहिए

हरीश शर्मा

एजेंडा तो है नहीं। पिछली बैठक की जो रिपोर्ट भेजी है। वह भी हैरान करने वाली है। इसमें पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गोलमोल तरीके रखा गया है। ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ, पहली बार हुआ है।

रिपोर्ट हैरान करने वाली

सोनिया रानी

एजेंडे के बिना बैठक में जाना कोई औचित्य नहीं है। वहां बैठकर पार्षद फिजूल में अपना समय बर्बाद करेंगे। मेयर को चाहिए था कि वह पहले पार्षदों से पूछते। फिर बैठक बुलाते।

पहले पूछते फिर बुलाते

ललता प्रसाद

यह हैरानी की बात है कि निगम की बैठक बिना एजेंडे के बुलाई जा रही है। जब एजेंडा ही नहीं है तो मीटिंग बुलाने का क्या औचित्य है। इस बारे में वह मेयर रमेश मल से बात करेंगे।

मेयर से मिलेंगे

सुधीर जायसवाल

पहली बार हो रहा है कि बिना एजेंडे के बैठक बुलाई गई है। ऐसा लगता है कि निगम ने पूरे शहर का विकास कर दिया है। नगर निगम को अब शहर के विकास की चिंता नहीं है।

विकास की िचंता नहीं

दलजीत सिंह भाटिया

बैठक में एजेंडा नहीं होगा तो बैठक में जाएगा कौन। वैसे भी पार्षदों से एजेंडा बनाते वक्त कोई सलाह नहीं ली जाती। लोगों के नक्शे पास नहीं होते। पार्षदों को कुछ बताया नहीं जाता।

सलाह नहीं ली जाती

हिम्मत सिंह