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अब एमडी की बजाए एसई ही करेंगे एसडीओ का तबादला
उिचत कारण पर हो सकता है तबादला
हरियाणाबिजलीवितरण निगम ने अपने प्रबंधक निदेशक की शक्तियों को कम कर अधीक्षक अभियंता (एसई) की पावर बढ़ा दी है। विद्युत निगम ने एक डिलीवरी ऑर्डर जारी कर यह अहम फैसला लिया है। इससे प्रदेशभर के एसई पॉवरफुल हो गए हैं। फैसले के बाद अब प्रदेशभर के एसई अपने स्तर पर एसडीओ का तबादला कर सकेंगे। तबादले के लिए अब एमडी के कार्यालय के चक्कर काटने से भी निजात मिल जाएगी। सरकार के इस फैसले से विभाग के अफसरों में हड़कंप का माहौल है।
> दरअसल प्रबंधक निदेशक पर बढ़ रहे लोड को कम करने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद लापरवाही गड़बड़ी करने वाले एसडीओ को एसई अपने स्तर पर ही ट्रांसफर कर सकेंगे। सरकार के इस फैसले के चलते अब निगम में एसई का रुतबा तो बढ़ेगा ही, साथ ही एसडीओ अब किसी तरह की लापरवाही और गड़बड़ी करने से पहले कई बार विचार करेंगे। पहले यह पावर उनके हाथ में नहीं होने से एसडीओ के मन में एसई का कोई भय नहीं था।
> एसई की पावर बढ़ने से अब उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतों की सुनवाई की आस भी जग जाएगी। अब उपभोक्ताओं को अपने ही जिले में आसानी से न्याय भी मिल सकेगा। पहले एसई यह काम करने में हाथ खड़े कर देते थे। लिहाजा उपभोक्ताओं को एमडी कार्यालय में पहुंच कर गुहार लगानी पड़ती थी।
फैसले के प्रभाव
^इस तरह के आदेश जारी कर दिए हैं। यदि कोई उचित कारण होगा तो हम एसडीओ का तबादला कर सकते हैं। आरकेशर्मा, एसईविद्युत निगम
बिल में गड़बड़ी, सप्लाई में बाधा, बिजली चोरी रोक पाना, उपभोक्ताओं का शोषण, इस तरह के मामले एसडीओ स्तर के होते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों के एसडीओ अपनी कन्नी काट लेते हैं। निगम के पास आने वाले 65 फीसदी शिकायतें एसडीओ से जुड़ी होती हैं। शिकायतों पर संज्ञान लिया जाता है और फाइल को एमडी के पास भेज दिया जाता है। एमडी कार्यालय में इस तरह के केस होने के कारण सुनवाई में कई माह बीत जाते हैं। इस बीच एसडीओ कहीं कहीं से एप्रोच या खुद एमडी के पास हाजिरी लगाकर मामले को कमजोर कर केस को कमजोर बना देते हैं। अब इनकी सुनवाई सीधे एसई अपने स्तर पर करते हुए एसडीओ के खिलाफ एक्शन ले सकेंगे।