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बेटा भविष्य के सपने संजो रहा था इधर पिता को छीन लिया काल ने

7 वर्ष पहले
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बेटाभविष्यके सपने संजोए घर पर कैमिस्ट्री का पेपर देने की तैयारी कर रहा था। इधर, काल ने पिता की जिंदगी छीन ली। सुनहरे भविष्य की आस में पढ़ाई में लीन बेटे शुभम काे इस बात की खबर ही नहीं लगी कि उसके पिता रजनीश शर्मा का साया उसके सिर से उठ गया है। वह हमेशा के लिए उससे दूर जा चुके हैं। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे मिलिट्री एरिया में मामा-भांजा पीर के पास सामने से तेज रफ्तार से रही कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

लोगों ने उन्हें अस्पताल भी पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में पहुंचते ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सिर में गहरी चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। मानव चौक स्थित सोनिया कॉलोनी के निवासी रजनीश शर्मा सीनियर सेकेंडरी स्कूल बीसी बाजार में बतौर प्रिंसिपल कार्यरत थे। स्वभाव से वे बेहद अच्छे इंसान थे।

सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान से हुए थे सम्मानित

शिक्षाक्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2013 में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान पर्व पर सम्मानित भी किया जा चुका है। रजनीश के भांजे हैप्पी ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे वह स्कूल के किसी काम से जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय की ओर रवाना हुए थे। मिलिट्री एरिया में तेज रफ्तार से रही कार ने उन्हें अपनी चपेट में लिया लिया।

सुनवाई हो तो लें कोर्ट का सहारा

धारा-337के तहत अफसर द्वारा ऐसा काम करना जिससे किसी को नुकसान हो या फिर जान जाने का खतरा या जान चली जाए तो इसमें संबंधित अफसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। धारा-268 के तहत जनता की सबसे विकट समस्या को समझने और उसका समाधान कराना संबंधित अफसर की जिम्मेदारी है।

कानून के अनुसार अगर आवारा पशुओं के कारण कोई दुर्घटना होती है तो उसके जिम्मेदार डीसी, मेयर नगर निगम हैं। इसके लिए उन्हें जुर्माना सजा दोनों हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति आवारा पशु के कारण घायल होता है या फिर उसकी जान चली जाती है तो परिजन मुआवजा पाने के हकदार हैं। परिजन पूरे घटनाक्रम की शिकायत जिला उपायुक्त, नगर निगम प्रशासन या हुडा प्रशासन, मुख्यमंत्री, गृह सचिव और राज्यपाल से कर सकते हैं।

पीड़ित व्यक्ति उसके परिजनों, रिश्तेदारों द्वारा प्रार्थना पुलिस अधीक्षक, शासन-प्रशासन तक पहुंचाई जाए। इसमें घटना का ब्यौरा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सबूतों सहित, किसकी लापरवाही है और समाज में घटना के बाद क्या फर्क पड़