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कैंटोनमेंट बोर्ड के वोटरों को भी मिल सकता है नोटा से प्रत्याशियों को खारिज करने का माैका

7 वर्ष पहले
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11जनवरीको होने वाले कैंटोनमेंट बोर्ड के चुनावों में भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह वोटरों को नोटा यानी कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं का अधिकार, इस्तेमाल करने का मौका मिल सकता है। देश के 62 में से 57 कैंटाेनमेंट बोर्डों के एक साथ ही चुनाव होने हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से हाेंगे या फिर ईवीएम से। सेना चाहती है कि अबकी बार ईवीएम से ही चुनाव करवाए जाएं जिसके लिए रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भी भेज दिया गया है।

किसीको फायदा तो किसी को होगा नुकसान: सूत्रोंकी मानें तो चुनावों में अबकी बार कैंटोनमेंट बोर्ड के वोटरों को नोटा की सुविधा भी मिल सकती है।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तर्ज पर ही यहां का वोटर इस सुविधा का लाभ लेना चाहेंगे। यदि रक्षा मंत्रालय की ओर से नोटा का प्रावधान इन चुनावों में दे दिया जाता है तो कई उम्मीदवारों के चुनावी परिणाम गड़बड़ा सकते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी प्रत्याशी लोगों को नाेटा से दूरी बनाए रखने का आह्वान कर सकते हैं। ईवीएम में नोटा का बटन सबसे नीचे बनाया गया है।

लोस और विस चुनाव में हुआ था नोटा का उपयोग

लोकसभाचुनावों में अम्बाला कैंट के 976 वोटरों ने नोटा बटन का उपयोग किया था। वहीं सिटी के 1084, मुलाना के 681 और नारायणगढ़ के 615 वोटरों को कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आया था। विधानसभा चुनावों में कैंट में 1007 मतदाताओं ने तमाम उम्मीदवारों को खारिज करते हुए नोटा का इस्तेमाल किया था। सबसे ज्यादा सिटी के 1101, मुलाना के 651 आैर नारायणगढ़ के 539 वोटरों ने इस अधिकार का इस्तेमाल किया था। अब देखना है कि कैंटोनमेंट चुनावों में नोटा कितने उम्मीदवारों के समीकरणों को प्रभावित करेगा। अम्बाला कैंटोनमेंट बोर्ड चुनावों में 8 वार्डों के 30350 वोटर 21 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेंगे।

^अभी कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है। ये फैसले डायरेक्टर जरनल डिफेंस आैर मंत्रालय के होते हैं। हमारे पास जो निर्देश आएंगे, उसी के तहत चुनावों की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं। अरविंदकुमार द्विवेदी, सीईओ,अम्बाला कैंटोनमेंट।