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सरकार नहीं देगी तो गरीब अभिभावकों को ही देनी होगी पूरी फीस
134केतहत अपने बच्चों को मुफ्त दाखिला दिलाने की आस में बैठे अभिभावकों को निदेशक सेकेंडरी एजुकेशन ने बड़ा झटका दिया है। अब 134 के तहत दाखिला ले चुके पहली कक्षा के विद्यार्थियों के अभिभावकों को ही इन स्कूलों की महंगी फीस चुकानी होगी।
शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि 134 के तहत पहली कक्षा के जिन विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया है, अगर उनकी फीस प्रदेश सरकार नहीं देती तो उनके अभिभावकों को ही यह फीस चुकानी होगी। सभी अभिभावकों को एक अंडरटेकिंग फार्म पर हस्ताक्षर करने होंगे तभी उनका दाखिला मान्य होगा।
134 के तहत जिले के 92 विद्यार्थियों को पहली कक्षा में दाखिला मिला था। पहली और दूसरी के कुल 152 विद्यार्थियों को 134 के तहत दाखिला दिया गया था।
पहली के लिए ही आदेश जारी किए गए
^हमारेपास विभाग की ओर से आदेश आए हैं। सरकार यदि पैसा नहीं देगी तो बच्चों के अभिभावकों को ही फीस भरनी होगी। फिलहाल पहली कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ही आदेश जारी किए गए हैं। धर्मवीरकादियान, जिलामौलिक शिक्षा अधिकारी।
आगे क्या
इसआदेश को आधार बनाकर अब निजी स्कूल दूसरी कक्षा के जिन विद्यार्थियों को मुफ्त दाखिला दिया गया है, उनकी फीस भी सरकार या इन विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा ही दिए जाने की याचिका हाइकोर्ट में डालकर दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी फीस देने पर मजबूर कर सकते हैं। ऐसे में अब हर कक्षा के लिए निजी स्कूलों को छूट मिलनी तय है।
फैसले के प्रभाव
हाइकोर्टके फैसले के बाद यदि सरकार इन बच्चों की फीस नहीं देगी तो गरीब अभिभावक इन स्कूलों की फीस देने में सक्षम नहीं होंगे। लिहाजा मई से 134 के तहत पहली कक्षा में पढ़ने वाले प्रदेशभर के विद्यार्थियों के अभिभावकों को मजबूरन अपने बच्चों को स्कूल छुड़वाना पड़ेगा।
134 के तहत जिले में हैं कुल 6025 सीटें
134के तहत जिले के 224 स्कूलों में जिनमें 108 सीनियर सेकेंडरी 116 मिडिल प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं, कुल सीटें 6025 हैं। इनमें से 168 स्कूलों में 3128 सीटें पहले से ही भरी थी। ऐसे में इस बार केवल 2887 सीटों पर ही 134 के तहत दाखिला दिया जाना था।
क्या है 134 अधिनियम
दरअसल,निजी स्कूलों को मान्यता लेते समय एक फार्म भरकर देना होता है। इस फार्म में निजी स्कूल यह गारंटी देते