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अतिक्रमण का \"जिन्न\' कैंट के बाजारों में बरकरार
कोर्ट में मंडे मार्केट को लेकर याचिका डालने और सिद्ध होने पर प्रशासन पर अवमानना का केस दर्ज होना तय
भास्करन्यूज | अम्बाला
3सालपहले एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा कैंट के बाजारों से अतिक्रमण को हटाने के लिए छेड़ी गई मुहिम को अभी तक मुकाम नहीं मिला है। हाइकोर्ट के आदेशों के बावजूद 9 महीने से कैंट के बाजारों से अतिक्रमण हटाने के लिए चल रही जद्दोजहद भी सिरे नहीं चढ़ी है। सिरे चढ़ना तो दूर उल्टा एक बार फिर मंडे मार्केट के नाम पर बाजार अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है।
मंडे मार्केट के नाम पर सुरक्षा व्यवस्था को भी तार-तार किया जा रहा है। मंडे मार्केट में कैंट के सदर बाजार में करीब 250 फड़ी और करीब 3 दर्जन रेहड़ियां बाजार में खड़ी होती हैं। इस तरह करीब 300 फड़ी और रेहड़ी लगने के चलते तकरीबन 200 अनआइडेंटिफाइड लोग जिले प्रदेश से बाहर के आकर यहां कारोबार करते हैं। ऐसे में कोई आतंकी घटना तक अासानी से हो सकती है।
जामका पर्यायी बना सदर बाजार : रेहड़ी-फड़ियों के चलते सदर बाजार की हालत ऐसी है कि अब बाजार जाम का पर्यायी बन चुका है। बेदी द्वारा की मुहिम के बावजूद अाज भी जाम की स्थिति बद से बदतर है। कैंट से अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान सदर बाजार में 20 फीट सड़क चौड़ी हुई थी। इसका इस्तेमाल आम जनता को करना था लेकिन अब इसपर रेहड़ी-फड़ी वालों ने दुकानदारों और प्रशासनिक अफसरों की मिलीभगत के चलते स्थाई कब्जा जमा लिया है।
खुदप्रशासन दे रहा अतिक्रमण को बढ़ावा : ध्यानरहे कि जिला प्रशासन खुद अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। सदर बाजार एसोसिएशन मंडे मार्केट का विरोध कर चुकी है लेकिन जिला प्रशासन की शह पर मंडे मार्केट बरकरार है। ध्यान रहे कि अक्टूबर में सदर बाजार एसो. मंडे मार्केट को लेकर तत्कालीन डीसी डॉ. साकेत कुमार से मिली थी, लेकिन डीसी के आदेशों के कारण ही मंडे मार्केट हटाने की बजाए बरकरार रही।
कोर्ट ने लगाया था एसपी केके संधू पर जुर्माना
कई वर्ष पहले अम्बाला के एसपी केके संधू पर कोर्ट के आदेशों की अवमानना पर उन्हें जिला सत्र न्यायधीश एमएम ढौंचक ने पूरे दिन कोर्ट में बिठाकर रखा। बाद में उन पर जुर्माना लगाया था।
^व्यवस्था कायम करना प्रशासन के साथ-साथ रेहड़ी-फड़ी वालों का काम ही नहीं जिम्मा भी है। ऐसी व्यवस्था हो की किसी को नुकसान हो। मंडे मार्केट से निश्चित तौर पर आम जनता जाम से जूझती है। कुछ लोगों ने