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खाते-पीते कभी भी कर सकते हैं \"हरिनाम\'

7 वर्ष पहले
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अम्बाला| बीपीएसप्लेनेटोरियम में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को भक्ति वेदांत सिद्धांती महाराज ने शुकदेव महाराज, नारद मुनि वेदव्यास के जीवन चरित्र का सविस्तार वर्णन किया। कथा में एक से बढ़कर एक उमदा शिक्षाओं को सुनकर भक्त आनंदित हो गए। सिद्धांती महाराज ने कहा कि कलियुग में हरिनाम के संकीर्तन के अतिरिक्त जीव कल्याण का कोई दूसरा मार्ग नहीं है। खाते-पीते, चलते-फिरते, सोते-जागते कभी भी हरिनाम किया जा सकता है। सिद्धांती महाराज के साथ अन्य भक्त मंडली ने प्रभु कीर्तन की लाजवाब प्रस्तुति से सभी को नचा दिया।