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बोर्ड की चल रही परीक्षाएं और प्राइमरी की लग रही कक्षाएं
धूल भरी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे।
^मैं विभाग के ही काम से एपीएआर साइन कराने गुड़गांव आई हूं। मामले की जांच कराई जाएगी। वैसे सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि बोर्ड की परीक्षा के दौरान कोई क्लास नहीं चलेगी। वंदनागुप्ता, डीईओअम्बाला
^मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं खुद डीईओ फ्लाइंग टीम में शामिल हूं और स्कूलों की जांच कर रही हूं। पता करती हूं कि स्कूल में क्यों पढ़ाई कराई गई है। ज्योतिसभरवाल, प्रिंसिपलराजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुराना
>बेंच होने से विद्यार्थियों ने जमीन पर बैठकर दी परीक्षा
>प्रिंसिपल डीईओ फ्लाइंग टीम के साथ करती रहीं स्कूलों का दौरा
भास्करन्यूज| अम्बाला
दुरानासरकारीस्कूल में बोर्ड की परीक्षा के दौरान सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ गई। एक तरफ बोर्ड के परीक्षार्थी विद्यालय के एक कमरे में जमीन पर बैठक कर परीक्षा देते रहे, दूसरी ओर स्कूल के प्रांगण में ही प्राइमरी की कक्षाएं चलती रही। स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति सभरवाल खुद डीईओ की फ्लाइंग टीम में शामिल होने की वजह से विभिन्न स्कूलों के दौरे में जुटी रहीं। जबकि प्रशासन की ओर से सख्त आदेश हैं कि बोर्ड की परीक्षा के दौरान किसी भी सरकारी स्कूल में पढ़ाई का काम नहीं होगा। मौके पर मिले परीक्षा सुपरिंटेंडेंट अमरीक सिंह से जब मामले में बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने से साफ मना कर दिया।
यहथा मामला : मंगलवारको राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुराना में 10वीं कक्षा के मैथ का पेपर चल रहा था। दूसरी ओर प्रांगण में ही प्राइमरी की पहली दूसरी कक्षा की पढ़ाई चल रही थी। बेंच के अभाव में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थी और पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी दोनों जमीन पर बैठे थे। परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को तो बैठने के लिए टाट पट्टी भी मिली थी लेकिन पढ़ाई कर रहे बच्चे वैसे ही प्रांगण में धूल-मिट्टी में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को जमीन पर बैठने की वजह से जूते भी खोलकर कमरे के बाहर रखना पड़ा। सभी विद्यार्थी बिना जूते-चप्पल के ही कमरों में बैठकर परीक्षा देते रहे। जमीन पर बैठने की वजह से विद्यार्थियों की लिखावट लिखने की स्पीड पर भी फर्क पड़ रहा था। कुछ बच्चों से टीचर स्कूल में मौजूद फूलों की क्यारियों में पानी दिलवाने का काम करा रहे थे। मौके पर