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अतिक्रमण ने पुलिस अफसरों को गाड़ियों से उतारा

7 वर्ष पहले
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तोंद वाले जवान को किया लाइन हाजिर

सर्राफाबाजारमें आगजनी की घटना के बाद सदर क्षेत्र को वन वे कराने आए पुलिस अफसरों को अतिक्रमण का सामना करना पड़ गया। इतना ही नहीं, अफसरों को हारकर अपनी-अपनी सरकारी गाड़ियों से नीचे उतरना पड़ा। इसी बीच डीसीपी सुरेंद्र पाल सिंह ने इशारा कर दिया है कि लोगों की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।

कबाड़ीबजार में जाम में फंसने के बाद उतरे कार से : सदरचौक पर पुलिस अफसरों और मुलाजिमों को वन वे ट्रैफिक का पूरा खाका समझाने के बाद डीसीपी का काफिला रूट चेकिंग के लिए निकला। काफिले में एसीपी हेडक्वार्टर पंखुड़ी कुमार, एसीपी कैंट जगदीप सिंह, एसीपी ट्रैफिक सुभाष भुक्कल भी उनके साथ थे। जैसे ही डीसीपी की कार कबाड़ी बाजार में दाखिल हुई तो अतिक्रमण से उनका सामना हो गया। दुकानों के बाहर कई-कई फुट तक रखे सामान की वजह से ट्रैफिक बाधित हो रही थी। डीसीपी की कार को जाम में फंसे देखकर दुकानदारों को भी पसीना गया। आनन-फानन में दुकानदारों ने सामान हटाने का प्रयास किया। जब जाम नहीं खुला तो डीसीपी समेत बाकी पुलिस अधिकारियों को अपनी-अपनी कारों से नीचे उतरना पड़ा। यहां से वाया निशात सिनेमा होते हुए पुलिस अफसर पैदल ही सदर मोड़ तक गए।

सदर चौक पर कार फंसने के बाद निर्देश देते डीसीपी सुरेंद्र पाल सिंह फंसी डीसीपी की कार।

सदर बाजार में कुल 60 दुकानें हैं। इतनी ही बजाजा बाजार में। हर दुकान के सामने दो फड़ी वाले यानी कि 260 फड़ी करीब 2 दर्जन रेहड़ियां लगती हैं। विजय रतन चौक से लेकर जैन सोडा वाटर तक करीब 30 दुकानें हैं लेकिन यहां औसतन 60 से अधिक छोटी-बड़ी रेहड़ी-फड़ी लगती हैं। 320 रेहड़ी-फड़ियों से बाजार के सभी दुकानदारों को कुल मिलाकर हर सप्ताह कम से कम 35 हजार रुपए का मुनाफा होता है। यानी एक महीने में करीब डेढ़ लाख रुपए की आमदनी। हाइकोर्ट की सुनवाई के दौरान यदि बेदी इस मामले को उठाएंगे तो प्रशासनिक अफसरों पर कोर्ट की अवमानना का नया केस दर्ज होना तय है। (5000के हिसाब से एडवांस... पढ़ें पेज 16)

अम्बाला | बढ़ीतोंद की वजह से एक पुलिसकर्मी की नौकरी खतरे में पड़ गई। शुक्रवार को डीसीपी सुरेंद्र पाल सिंह जब बाजारों का निरीक्षण कर रहे थे तभी उनकी नजर अचानक साथ चल रहे एक मोटे पुलिस कर्मी पर पड़ी। उन्होंने उसे अपने पास बुलाया। बोले, इतना पेट क्यों निकल गया है। हेड कांस्टेबल