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जहां शिफ्ट होनी थी डेयरियां, उसी जमीन को निगल गए भू माफिया
करधानकी115 एकड़ शामलात जमीन घोटाले में नया मोड़ गया है। पता चला है कि कैंट में जिन डेयरियों के लिए जमीन चिन्हित की गई थी यह वही जमीन है। पूर्व की इनेलो सरकार ने यहां डेयरी शिफ्ट करने का प्रपोजल दिया था। उस दौरान करीब 25 एकड़ जमीन का चयन किया गया था। सरकार जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने 25 एकड़ जमीन डेयरी शिफ्ट करने के लिए आरक्षित की थी तो अब उस जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो रही है, इस मामले में कैंट उप तहसील के अधिकारी मौन हैं। इस बारे में जब डीसी मनदीप बराड़ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर इस बाबत कोई हेराफेरी हुई है तो वे सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंंने बताया कि शामलात जमीन की फर्जी रजिस्ट्री मामले में उन्होंने एसडीएम मीनाक्षी गोयल को जांच अधिकारी बनाया है। एसडीएम का कहना है कि उन्हें डीसी ने मामले की जांच करने को कहा है। वे जल्द ही इस संबंध में जांच करेंगी।
जमाबंदी को किया संशोधित
उपतहसील की मिलीभगत के कारण शामलात जमीन पर भू माफियाओं का कब्जा हो रहा है। इस बारे में प्रशासन के किसी भी बड़े अधिकारी ने उप तहसील में जाकर मामले की जानकारी लेना उचित नहीं समझा। यह भी पता चला है कि जमाबंदी को संशोधित करके रिकॉर्ड दोबारा तैयार किया गया है। ढुलमुल रवैये के कारण यह जमीन भू माफियाओं और रसूखदार लोगों के हाथों में चली गई है। उप तहसील के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले निचले स्तर पर शामलाती जमीन के रिकॉर्ड के साथ हेराफेरी की गई और उसे बदल दिया गया। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा था कि पिछले दो वर्षों के दौरान जो रजिस्ट्रियां हुई हैं, उसकी सरकार जांच करा रही है। उन्होंने बताया कि आयुक्त के पास इसकी जांच चुकी है।