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हाई मास्ट टाॅवर्स पर लगेंगी एलईडी लाइट्स

7 वर्ष पहले
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अम्बालारेलवेस्टेशन के हाई मास्ट टॉवरों पर अब एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। अम्बाला रेलवे स्टेशन पर ही इन लाइटों को मंडल रेलवे की अोर से पहली बार प्रयोग के तौर पर लगाया जा रहा है। विभाग द्वारा इन लाइटों को मंडल के रेलवे स्टेशनों पर लगाने की वजह यात्रियों को कम बिजली की खपत में उम्दा प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना और लंबी अवधि तक मेंटेनेंस के झंझट से बचना है। अम्बाला के बाद इन लाइटों काे मंडल के पंजाब यूपी के रेलवे स्टेशनों पर भी लगाया जाएगा।

अभी कैंट रेलवे स्टेशन के तीन हाई मास्ट टॉवरों पर 800 वाट की 24 मेटल लाइटें लगी हुई हैं। इनका प्रकाश भी बहुत उम्दा नहीं है। इनका विद्युत लोड 19.2 किलोवाट है। इनमें मेंटनेंस की झंझट भी है। जबकि 120 वाट की एलईडी लाइटों से 2.88 किलोवाट बिजली खर्च होगी। इसे लगाने के बाद 85 प्रतिशत बिजली की बचत होगी, साथ ही रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में यात्रियों को उत्तम प्रकाश व्यवस्था भी मिलेगी।

मंडल की ओर से उत्तर रेलवे के विभिन्न ट्रेनों के 60 काेचों में भी 20 वाट की ट्यूब लाइट की जगह 10 वाट की लेड लाइटें लगवाई हैं। काेचों में कुल 1500 लेड लाइटें लगाई गई हैं, जिससे 50 प्रतिशत बिजली की बचत होगी। यात्रियों को उत्तम प्रकाश भी मिलेगा।

^स्टेशनों पर एलईडी लाइटें लगाने की योजना है। इससे कम बिजली की खपत में यात्रियों को उत्तम प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध होगी पुनीतकठपालिया, सीनि.डिवीजनलइलेक्ट्रिक इंजीनियर अम्बाला डिवीजन

यहां भी लगेंगी लेड लाइट्स

अम्बालारेलवे स्टेशन के बाद मंडल के चंडीगढ़, पटियाला, सरहिंद सहारनपुर रेलवे स्टेशनों पर भी लेड लाइटों को लगाया जाएगा।

लांग लाइफ होती है लेड लाइट्स

एनर्जीसेव करने के अलावा एलईडी लाइटों की लाइफ भी ज्यादा होती है। ट्यूब लाइट की लाइफ 10 हजार घंटे होती है वहीं लेड लाइटों की लाइफ ट्यूब लाइट की अपेक्षा 5 गुना अधिक 50 हजार घंटे होती है। यद्यपि इसकी कीमत भी ट्यूब लाइट से 5 गुना अधिक होती है लेकिन इसके प्रयोग से बिजली के बिल में बचत कर सकते हैं। ज्यादा दिन तक चलने से इसके बार-बार बदलने की झंझट नहीं होती।

10 रेलवे फाटकों पर लगाए सोलर होम लाइट सिस्टम

अम्बाला|अम्बालाडिवीजन के 10 रेलवे फाटकाें पर डिवीजन के विद्युत विभाग की ओर से सोलर होम लाइटें लगाई गई हैं। इससे रेलवे फाटकों पर अब रात काे भी अंधेरा नहीं रहेगा