आपका सफर बन सकता है खतरे का सबब
देशभरमेंजहां बुधवार से वेब बेस्ड टैक्सी सर्विस बंद होने जा रही है। वहीं जिला प्रशासन का अवैध रूप से चल रही टूर एंड ट्रैवल्स एजेंसियों पर कोई ध्यान नहीं गया। अम्बाला जिले में लगभग एक हजार ट्रैवल एजेंसियों ऐसी हैं, जिनका सरकार के पास कोई रिकाॅर्ड ही नहीं है। यदि कोई व्यक्ति इन एजेंसियों की गाड़ियों के जरिए अपनी यात्रा करता है तो रास्ते में ड्राइवर सवारी के साथ कोई अप्रिय घटना करने पर ही एजेंसी के पास इसका कोई जवाब होता प्रशासन के पास। आरोपी ड्राइवर को पकड़ने के लिए भी पुलिस को मशक्कत करनी पड़ती है।
जिले में कुछ ही ट्रैवल्स एजेंसियां ऐसी होंगी जो ड्राइवर को काम पर रखने से पहले पुलिस वेरीफिकेशन करवाती हैं। एजेंसियां पैसों के लालच के चलते बिना किसी जानकारी के ड्राइवरों को काम पर रख लेती हंै। वे ये भी जानना उचित नहीं समझती हैं कि जिसे वे काम पर रख रही हैं, उसका पिछला कोई क्रिमिनल रिकाॅर्ड तो नहीं है। अपने फायदे के लिए वे लोगों की जान को खतरे में डाल देती है। हैरानी की बात यह भी है कि प्रशासन भी ऐसी एजेंसियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है।
क्यों नहीं कराते पुलिस वेरीफिकेशन
ट्रैवल्सएजेंसियों को कमर्शियल गाड़ियां ही चलवाने की अनुमति होती है। इसके लिए उन्हें कमर्शियल लाइंसेसधारक ड्राइवर की जरूरत होती है। कमर्शियल लाइंसेस वाले ड्राइवर को तनख्वाह भी ज्यादा लेते हैं। इसके चलते एजंेसियां बिना कमर्शियल लाइसंेस वाले ड्राइवरों से ही गाडि़यां चलवाती हैं। पुलिस वेरीफिकेशन के समय उन्हें कमर्शियल लाइंसेस ड्राइवर की जरूरत पड़ती है। इसके चलते एजेंसियां ड्राइवरों की वेरीफिकेशन नहीं कराती है।
लालचमें भी होते हैं हादसे
सड़ककिनारे खड़े होकर बस का इंतजार करते समय यदि कोई टैक्सी आती है और बस से कम रुपए में छोड़ने की बात कहती है तो सवारी उसमें सफर करना ज्यादा उचित समझते हंै। इसी का फायदा ड्राइवर उठाते हैं।
ये जरूरी है एजेंसी रजिस्टर्ड कराने के लिए
ट्रैवल्सएजेंसी को अपनी एजेंसी रजिस्टर्ड कराने के लिए सेंट्रल एक्साइज डिर्पाटमेंट से सर्विस टैक्स रजिस्टर्ड नंबर लेना होता है। यह नंबर लगभग तीन हजार रुपए तक मिलता है। इस टैक्स को बचाने के लिए ट्रैवल्स एजेंसी अपनी एजेंसी को रजिस्टर्ड नहीं कराती है।
कैसेलगती है सरकार को चपत
कुछही ट्रैवल्स एजेंसी ऐसी होती हैं जो कमर्शियल नंबर लेक